कड़वाहट में घुलता सच
विनोद कुमार झा कभी-कभी सच इ उसतना कड़वा नहीं होता, जितना उसे कहने का तरीका उसे बना देता है। श…
विनोद कुमार झा कभी-कभी सच इ उसतना कड़वा नहीं होता, जितना उसे कहने का तरीका उसे बना देता है। श…
- रिश्ते कांच की तरह होते हैं, उन्हें टूटने के लिए किसी बड़ी चोट की जरूरत नहीं होती लेखक: विनोद …
- जवानी निरर्थक नहीं, सार्थक करें विनोद कुमार झा शहर के उस पुराने मोहल्ले में शाम होते ही चौराह…
-रोशनी के पीछे छिपे अंधेरों की कहानी लेखक की कलम से विनोद कुमार झा मुंबई... वह शहर जो कभी सोत…
लेखक: विनोद कुमार झा सावन की पहली संध्या थी। दिन भर की उमस के बाद आसमान पर काले बादलों ने अपना …
"जब हम खुद दोषी हैं तो किसे दोषी कहूँ..." लेखक: विनोद कुमार झा शाम का समय था। आसमान…
लेखक : विनोद कुमार झा गांव के उस पुराने मकान की दीवारों पर समय की परतें जम चुकी थीं। बरामदे के …
-नदी के बीच डगमगाती नाव और आज का संघर्षरत समाज लेखक: विनोद कुमार झा सांझ ढल रही थी। नदी का जल …
लेखक: विनोद कुमार झा गाँव के बाहर कच्ची सड़क के किनारे एक पुरानी, जर्जर और जगह-जगह से टूटी हु…
विनोद कुमार झा सर्दियों की एक सुनहरी सुबह थी। शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ने वाली नेहा …
विनोद कुमार झा गर्मियों की एक तपती दोपहर थी। आसमान से आग बरस रही थी और धरती तवे की तरह तप रह…
लेखक: विनोद कुमार झा मई का महीना अपना रौद्र रुप के अंतिम सप्ताह में चल रहे हैं और जून का महीना …
विनोद कुमार झा गांव की पगडंडियों पर जेठ की धूप अंगारों की तरह बरस रही थी। खेतों की मिट्टी तपक…
- जो रिश्ता बाहरी चमक-दमक पर टिका हो, वह समय के साथ टूट जाता है - सच्चा प्यार त्याग, विश्वास और…
विनोद कुमार झा पुराने शहर की तंग गलियों के बीचों-बीच एक विशाल हवेली खड़ी थी। उसकी ऊंची दीवारें,…
लेखक: विनोद कुमार झा बरसात की हल्की फुहारों से भीगी वह सुबह गांव के पुराने कच्चे रास्तों को जैस…