आबिद हुसैन, हापुड़। उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ में अवैध कॉलोनियों और प्लॉटिंग का खेल जोरों पर है। बिना हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण (एचपीडीए) से मानचित्र स्वीकृति लिए ही दर्जनों जगहों पर मकानों का निर्माण हो रहा है और बड़े पैमाने पर प्लॉट काटे जा रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह अवैध कारोबार हापुड़ शहर से लेकर असौड़ा, बुलंदशहर रोड, चितौली रोड, श्यामपुर, बाबूगढ़ छावनी, राम फार्म हाउस के पास बागड़पुर रोड, नए बाईपास के आसपास, आटा मिल वाले रास्ते, बछलोता रोड, शाहपुर चोपला, राजा की हवेली से पहले चोपला फाटक, सिखेड़ा, सिंभावली, हरोड़ा मोड़, हसूपुर मोड़, सरूरपुर, गढ़मुक्तेश्वर, हसूपुर फाटक के पास रेलवे लाइन, जमाईपुरा, ठंडा प्याऊ और नक्के कुएं के पास फैला हुआ है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्राधिकरण ने कई बार नोटिस जारी कर निर्माण रुकवाया और प्रॉपर्टी डीलरों को चेतावनी दी कि दोबारा अवैध कार्य करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है—निर्माण फिर शुरू हो जाता है और प्लॉटिंग का धंधा पटरी पर लौट आता है।जनता में रोष व्याप्त है। एक निवासी ने बताया, "ये अवैध कॉलोनियां भविष्य में बड़ा खतरा बनेंगी। यहां बिजली, पानी, सड़क जैसी सुविधाओं का अभाव रहेगा और कानूनी सुरक्षा भी नहीं मिलेगी।" अब सवाल उठ रहा है कि क्या एचपीडीए इस मकड़जाले पर स्थायी रोक लगाएगा, या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?प्राधिकरण के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अभी कोई जवाब नहीं मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सख्त कदम न उठाए गए तो आम लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
