खबर मार्निंग, धर्म डेस्क
सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रावण कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर आज दिन की शुरुआत विशेष पंचांग योगों के साथ हो रही है। सुबह द्वादशी तिथि के बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। वहीं आर्द्रा नक्षत्र के बाद पुनर्वसु नक्षत्र और वज्र योग के बाद सिद्धि योग का संयोग बनेगा। ऐसे में आज का दिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आज की तिथि और नक्षत्र
पंचांग के अनुसार आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। द्वादशी तिथि प्रातः 08 बजकर 00 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ हो जाएगा।
आज आर्द्रा नक्षत्र दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र प्रारंभ होगा।
वहीं वज्र योग रात्रि 10 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सिद्धि योग का आरंभ होगा। करण की बात करें तो तैतिल करण सुबह 08 बजे तक रहेगा, इसके बाद गरज करण शुरू होगा।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
- सूर्योदय: प्रातः 05:47 बजे
- सूर्यास्त: सायं 07:05 बजे
- चंद्रोदय: रात 03:56 बजे, 11 अगस्त
- चंद्रास्त: सायं 05:18 बजे, 11 अगस्त
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : आज ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 03:55 बजे से 04:41 बजे तक रहेगा। धार्मिक दृष्टि से यह समय पूजा, ध्यान, जप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त : आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। इसे शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
अमृत काल : आज अमृत काल नहीं है।
आज का चौघड़िया मुहूर्त
दिन के चौघड़िया के अनुसार शुभ समय इस प्रकार रहेगा:-
- अमृत: सुबह 05:47 बजे से 07:27 बजे तक
- काल: सुबह 07:27 बजे से 09:07 बजे तक
- शुभ: सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक
- रोग: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक। इनमें अमृत और शुभ चौघड़िया को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए बेहतर माना जाता है।
आज के अशुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार आज कुछ समय ऐसे भी रहेंगे, जिनमें शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
- राहुकाल: सुबह 07:30 बजे से 09:00 बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक
- यमगंड: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान महत्वपूर्ण शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना उचित माना जाता है।
सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व
श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं। सावन के प्रत्येक दिन शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। माना जाता है कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
डिस्क्लेमर: पंचांग में दिए गए मुहूर्त और समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। धार्मिक मान्यताएं परंपराओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं।
