भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि शनिवार, आज दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा। धार्मिक दृष्टि से आज का दिन विशेष है, क्योंकि इसी दिन राधा अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। राधा अष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की आराध्या श्रीराधा के पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं। राधा अष्टमी की मध्याह्न पूजा के लिए सुबह 11 बजकर 1 मिनट से दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक का समय बताया गया है।
पंचांग के अनुसार आज मूल नक्षत्र अगले दिन तड़के 1 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ होगा। आयुष्मान योग दोपहर 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद सौभाग्य योग शुरू होगा। बव करण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा और इसके बाद बालव करण का आरंभ होगा। चंद्रमा दिन-रात धनु राशि में ही संचार करेगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त : 19 सितंबर को सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 8 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त सायं 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 1 बजकर 48 मिनट पर और चंद्रास्त रात्रि 11 बजकर 45 मिनट पर होगा।
आज के शुभ मुहूर्त : आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सायं 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। राधा अष्टमी के अवसर पर मध्याह्न पूजा का विशेष समय सुबह 11 बजकर 1 मिनट से दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
दिन का चौघड़िया : दिन का पहला चौघड़िया काल सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शुभ चौघड़िया सुबह 7 बजकर 40 मिनट से 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। रोग चौघड़िया सुबह 9 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक और उद्वेग चौघड़िया सुबह 10 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
आज के अशुभ मुहूर्त : आज राहुकाल सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक तथा यमगंड दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। धार्मिक अथवा शुभ कार्य करने वाले श्रद्धालु इन समयों को ध्यान में रखकर अपने कार्यों की योजना बना सकते हैं।
राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व : राधा अष्टमी को श्रीराधा के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। वैष्णव परंपरा में इस दिन राधा-कृष्ण की संयुक्त उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु उपवास, स्नान, ध्यान और पूजा के साथ श्रीराधा को पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य तथा श्रृंगार सामग्री अर्पित करते हैं। मध्याह्न काल में श्रीराधा की पूजा, आरती और भोग लगाने की परंपरा है। अनेक स्थानों पर मंदिरों में विशेष श्रृंगार, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।
पंचांग के अनुसार आज का दिन राधा अष्टमी के कारण धार्मिक आस्था की दृष्टि से विशेष रहेगा। श्रद्धालु राधा-कृष्ण का स्मरण कर सुख, सौभाग्य और शांति की कामना करेंगे।
