आज का पंचांग, 09 जुलाई 2026: नवमी तिथि का समापन, दशमी का होगा आरंभ; सर्वार्थसिद्धि योग से बढ़ेगा दिन का महत्व

भारतीय सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथियों का गणित नहीं, बल्कि दैनिक जीवन को शुभ-अशुभ काल, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। 09 जुलाई 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि प्रातः 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगी, इसके उपरांत दशमी तिथि का आरंभ होगा। दिनभर अश्विनी और भरणी नक्षत्र के प्रभाव के साथ सुकर्मा एवं धृति योग का शुभ संयोग बन रहा है। साथ ही सर्वार्थसिद्धि योग की उपस्थिति विभिन्न मांगलिक एवं शुभ कार्यों के लिए इस दिन को विशेष फलदायी बना रही है।

आज की तिथि एवं नक्षत्र

- तिथि: कृष्ण पक्ष नवमी प्रातः 10:38 बजे तक, तत्पश्चात दशमी तिथि प्रारंभ।

- नक्षत्र: अश्विनी नक्षत्र दोपहर 02:56 बजे तक, इसके बाद भरणी नक्षत्र।

- योग: सुकर्मा योग प्रातः 10:11 बजे तक, उसके बाद धृति योग।

- सर्वार्थसिद्धि योग: प्रातः 05:51 बजे से दोपहर 02:56 बजे तक।

करण

- गर करण: प्रातः 10:38 बजे तक।

- वणिज करण: प्रातः 10:38 बजे से रात्रि 09:32 बजे तक।

- विष्टि (भद्रा) करण: रात्रि 09:32 बजे से आरंभ।

सूर्य एवं चंद्रमा का समय

- सूर्योदय: प्रातः 05:51 बजे

- सूर्यास्त: सायं 07:12 बजे

- चन्द्रोदय: रात्रि 12:35 बजे

- चन्द्रास्त: दोपहर 02:02 बजे

आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त

धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, जप-तप तथा शुभ कार्यों के लिए आज कई उत्तम मुहूर्त उपलब्ध हैं।

ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 03:55 बजे से 04:41 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:59 बजे से 12:54 बजे तक

अमृत काल : प्रातः 08:03 बजे से 09:35 बजे तक

आज का चौघड़िया मुहूर्त

- शुभ (उत्तम): प्रातः 05:30 बजे से 07:13 बजे तक

- चर (सामान्य): अपराह्न 03:54 बजे से सायं 05:38 बजे तक

- लाभ (उन्नति): सायं 05:38 बजे से 07:22 बजे तक

- अमृत (सर्वोत्तम): सायं 07:22 बजे से रात्रि 08:38 बजे तक

आज के अशुभ काल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निम्न समय में महत्वपूर्ण कार्यों को आरंभ करने से बचना चाहिए-:

- राहुकाल: दोपहर 02:00 बजे से 03:30 बजे तक

- गुलिक काल: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक

- यमगण्ड काल: प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक

धार्मिक महत्व : आषाढ़ कृष्ण नवमी और दशमी का संधिकाल आत्मचिंतन, भगवान विष्णु एवं देवी उपासना के लिए विशेष माना जाता है। अश्विनी नक्षत्र स्वास्थ्य, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है, जबकि भरणी नक्षत्र कर्म, धैर्य और जिम्मेदारी का संदेश देता है। सुकर्मा और धृति योग के प्रभाव से आज किए गए सद्कर्म, दान-पुण्य तथा धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है। सर्वार्थसिद्धि योग की उपस्थिति दिन को और अधिक शुभ बनाती है, जिससे पूजा-पाठ, अध्ययन, निवेश, व्यापारिक निर्णय तथा अन्य सकारात्मक कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित होता है।

 शुभ कार्यों के लिए उपलब्ध श्रेष्ठ मुहूर्तों का लाभ उठाएं, लेकिन राहुकाल एवं अन्य अशुभ काल में महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचें। श्रद्धा, संयम और सकारात्मक कर्मों के साथ दिन का आरंभ करना मंगलकारी रहेगा।

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