वैदिक पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी और पंचमी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। वहीं पुनर्वसु नक्षत्र, रवि योग और अमृत काल जैसे शुभ योग दिन को और भी मंगलकारी बना रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज किए गए धार्मिक कार्य, दान-पुण्य, जप-तप और शुभ संकल्प विशेष फलदायी सिद्ध होंगे। हालांकि भद्रा, राहुकाल और वर्ज्य काल में मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी गई है।
तिथि एवं नक्षत्र
आज शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 11:06 बजे तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
आर्द्रा नक्षत्र सुबह 06:11 बजे तक रहेगा, इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र आरंभ होगा, जो अगले दिन सुबह 04:12 बजे तक प्रभावी रहेगा।
योग एवं करण
शूल योग दोपहर 02:10 बजे तक रहेगा, इसके बाद गण्ड योग प्रारंभ होगा।
करणों में विष्टि करण सुबह 11:06 बजे तक रहेगा। इसके बाद बव करण रात 09:42 बजे तक और फिर बालव करण प्रारंभ होगा।
ग्रह-नक्षत्र की स्थिति
चंद्रमा रात 10:38 बजे तक मिथुन राशि में रहेंगे, इसके बाद कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
सूर्य वर्तमान में वृषभ राशि में स्थित हैं।
सूर्योदय एवं चंद्रमा का समय
सूर्योदय: सुबह 05:28 बजे
सूर्यास्त: शाम 07:08 बजे
चंद्रोदय: सुबह 08:43 बजे
चंद्रास्त: रात 11:08 बजे
दिनमान एवं रात्रिमान
दिनमान: 13 घंटे 39 मिनट 58 सेकंड
रात्रिमान: 10 घंटे 19 मिनट 33 सेकंड
मध्याह्न: दोपहर 12:18 बजे
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:05 बजे से 04:46 बजे तक
प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:26 बजे से 05:28 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 बजे से 03:29 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:06 बजे से 07:27 बजे तक
सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:08 बजे से 08:10 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:57 बजे से 12:38 बजे (21 मई) तक
अमृत काल: रात 02:00 बजे से 03:28 बजे (21 मई) तक
रवि योग: सुबह 05:28 बजे से 06:11 बजे तक तथा अगले दिन सुबह 04:12 बजे से 05:27 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: दोपहर 12:18 बजे से 02:00 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 07:10 बजे से 08:53 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:35 बजे से 12:18 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से 12:45 बजे तक
भद्रा: सुबह 05:28 बजे से 11:06 बजे तक
दिशा शूल एवं अन्य विशेष जानकारी
दिशा शूल: उत्तर दिशा में रहेगा।
चन्द्र वास: रात 10:38 बजे तक पश्चिम दिशा में, इसके बाद उत्तर दिशा में रहेगा।
राहु वास: दक्षिण-पश्चिम दिशा में रहेगा।
अग्निवास: सुबह 11:06 बजे तक आकाश में, इसके बाद पाताल में माना जाएगा।
शिववास: सुबह 11:06 बजे तक क्रीड़ा में, इसके बाद कैलाश पर माना जाएगा।
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार आज का दिन आध्यात्मिक साधना, गणेश पूजन, विष्णु आराधना और शुभ कार्यों की योजना के लिए अनुकूल माना जा रहा है। पुनर्वसु नक्षत्र और रवि योग के प्रभाव से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा तथा नए कार्यों में सफलता मिलने के संकेत हैं।
