आज का पंचांग: साध्य से शुभ योग का संयोग, नवमी तिथि में आध्यात्मिक साधना और शुभ कार्यों के लिए विशेष दिन

22 जुलाई 2026, बुधवार। पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से नवमी तिथि आत्मचिंतन, पूजा-पाठ, जप-तप और आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। आज स्वाति नक्षत्र और साध्य योग का प्रभाव दिनभर बना रहेगा, जिसके कारण ज्ञान, विवेक और सकारात्मक कार्यों में सफलता के योग बन रहे हैं। सायंकाल के बाद शुभ योग का आरंभ होने से मांगलिक एवं शुभ कार्यों के लिए अनुकूलता और बढ़ जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दिन के विभिन्न मुहूर्तों का ध्यान रखकर किए गए कार्यों से विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है।

पंचांग विवरण

- मास : आषाढ़

- पक्ष : शुक्ल पक्ष

- तिथि : नवमी (पूर्ण रात्रि तक)

- नक्षत्र : स्वाति रात्रि 11:03 बजे तक, तत्पश्चात विशाखा

- योग : साध्य सायं 06:42 बजे तक, इसके बाद शुभ योग

- करण : बालव सायं 06:06 बजे तक, इसके बाद कौलव

सूर्य एवं चंद्रमा की स्थिति

- सूर्योदय : प्रातः 05:37 बजे

- सूर्यास्त : सायं 07:18 बजे

- चंद्रोदय : दोपहर 01:31 बजे

- चंद्रास्त : रात्रि 12:09 बजे (23 जुलाई)

आज के शुभ मुहूर्त

- ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 03:55 बजे से 04:41 बजे तक

- अभिजीत मुहूर्त : आज उपलब्ध नहीं

- अमृत काल : दोपहर 01:26 बजे से 03:11 बजे तक

चौघड़िया मुहूर्त

- लाभ (उन्नति) : प्रातः 05:37 बजे से 07:20 बजे तक

- अमृत (सर्वश्रेष्ठ) : प्रातः 07:20 बजे से 09:02 बजे तक

- काल : प्रातः 09:02 बजे से 10:45 बजे तक

- शुभ : दोपहर 12:27 बजे से 02:10 बजे तक

आज के अशुभ मुहूर्त

- राहुकाल : दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक

- गुलिक काल : प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक

- यमगंड : प्रातः 07:30 बजे से 09:00 बजे तक

धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

स्वाति नक्षत्र को स्वतंत्रता, नवाचार और प्रगति का प्रतीक माना जाता है। वहीं रात्रि में विशाखा नक्षत्र का प्रवेश लक्ष्य प्राप्ति और परिश्रम के फल का संकेत देता है। साध्य योग मनोवांछित कार्यों की सिद्धि में सहायक माना जाता है, जबकि सायंकाल आरंभ होने वाला शुभ योग मांगलिक कार्यों, पूजन, दान-पुण्य और नए संकल्पों के लिए विशेष फलदायी माना गया है।

धर्मग्रंथों के अनुसार नवमी तिथि पर भगवान विष्णु, माता दुर्गा तथा इष्टदेव की उपासना करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में आने वाली बाधाओं के निवारण का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रद्धालु आज जप, ध्यान, दान और सत्संग जैसे पुण्य कार्यों में समय व्यतीत कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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