आज फाल्गुन मास की शुक्ल चतुर्दशी तिथि के साथ आज का दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। होली के पावन पर्व की आहट के बीच ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रेम-सौहार्द के संकेत दे रही है। विशेष रूप से कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, बुध और राहु का संयोग सामाजिक प्रभाव और कार्यक्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने का योग बना रहा है, वहीं मीन राशि में शुक्र का प्रवेश सुख-सुविधाओं और प्रेम संबंधों के लिए शुभ फलदायी माना जा रहा है।
पंचांग विवरण
- विक्रम संवत: 2082
- शक संवत: 1947
- तिथि: शुक्ल चतुर्दशी – सायं 05:55 बजे तक, तत्पश्चात पूर्णिमा तिथि प्रारंभ
- नक्षत्र: आश्लेषा – प्रातः 07:51 बजे तक, उसके बाद मघा
- योग: अतिगण्ड – दोपहर 12:19 बजे तक, उसके बाद सुकर्मा
- करण: वणिज – सायं 05:55 बजे तक, उसके बाद विष्टि (भद्रा)
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
- सूर्योदय: प्रातः 06:45 बजे
- सूर्यास्त: सायं 06:21 बजे
- चंद्रोदय: सायं 05:20 बजे
- चंद्रास्त: प्रातः 06:33 बजे (3 मार्च)
आज चंद्रदेव आश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जिससे भावनात्मक गहराई और अंतर्ज्ञान में वृद्धि हो सकती है।
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 बजे से 12:57 बजे तक
- अमृत काल: प्रातः 05:09 बजे (3 मार्च) से 06:44 बजे (3 मार्च) तक
आज के अशुभ समय
- राहुकाल: प्रातः 08:12 बजे से 09:39 बजे तक
- यमगण्ड: प्रातः 11:06 बजे से 12:33 बजे तक
- गुलिकाल: दोपहर 02:00 बजे से 03:27 बजे तक
दिन का चौघड़िया
- अमृत: 06:11 प्रातः – 07:38 प्रातः
- काल: 07:38 प्रातः – 09:06 प्रातः
- शुभ: 09:06 प्रातः – 10:33 प्रातः
- रोग: 10:33 प्रातः – 12:01 दोपहर
- उद्वेग: 12:01 दोपहर – 01:28 दोपहर
- चर: 01:28 दोपहर – 02:56 दोपहर
- लाभ: 02:56 दोपहर – 04:24 सायं
- अमृत: 04:24 सायं – 05:51 सायं
होलिका दहन विशेष
होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन करना वर्जित माना गया है।
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भद्रा आरंभ: सायं 05:55 बजे
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भद्रा समाप्त: प्रातः 05:28 बजे
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भद्रा पुंछा: रात्रि 01:25 से 02:35 बजे तक
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भद्रा मुखा: रात्रि 02:35 से प्रातः 04:30 बजे तक
भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ रहेगा।
दिशाशूल
- दिशा: पूर्व
यदि यात्रा अत्यावश्यक हो तो दर्पण देखकर प्रस्थान करने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिषीय संकेत
कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, बुध और राहु का दुर्लभ संयोग साहस, निर्णय क्षमता और सामाजिक सक्रियता को बढ़ाने वाला है। वहीं मीन राशि में शुक्र का गोचर दांपत्य जीवन, प्रेम संबंध और कलात्मक कार्यों में सफलता का संकेत देता है।
फाल्गुन की यह पूर्णिमा और होलिका दहन का संयोग आत्मशुद्धि, नकारात्मकता के त्याग और नवऊर्जा के स्वागत का संदेश देता है। श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए पूजन से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति संभव है।
(नोट: पंचांग के समय स्थान विशेष के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं।)
