-धार्मिक आस्था, समय-संयम और शुभ-अशुभ का सटीक मार्गदर्शन
भारतीय संस्कृति में पंचांग केवल तिथियों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और शुभ बनाने का एक वैज्ञानिक व आध्यात्मिक आधार है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति हमारे दैनिक कार्यों, निर्णयों और शुभारंभों पर गहरा प्रभाव डालती है। ऐसे में 31 मार्च 2026 का पंचांग आपके दिन को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
तिथि एवं वार
आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रातः 06 बजकर 32 मिनट तक रहेगी, इसके पश्चात चतुर्दशी तिथि का आरंभ होगा।
वार: मंगलवार
नक्षत्र एवं चंद्र स्थिति
आज पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 02 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रारंभ होगा।
चंद्रदेव का गोचर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा, जो रचनात्मकता, प्रेम और सामाजिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
योग एवं करण
- योग: गंड योग दोपहर 03 बजकर 31 मिनट तक, इसके बाद वृद्धि योग
- करण: तैतिल करण के बाद गर करण।
- सूर्योदय एवं सूर्यास्त
- सूर्योदय: प्रातः 05 बजकर 42 मिनट
- सूर्यास्त: सायं 06 बजकर 05 मिनट।
- शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 28 मिनट से 12 बजकर 15 मिनट तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 52 मिनट से 02 बजकर 39 मिनट तक।
विशेष: दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान किए गए कार्य सफलता की ओर अग्रसर होते हैं।
अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 02 बजकर 58 मिनट से 04 बजकर 31 मिनट तक
- यमगण्ड: प्रातः 08 बजकर 47 मिनट से 10 बजकर 20 मिनट तक
- गुलिक काल: दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 25 मिनट तक। इस अवधि में महत्वपूर्ण कार्यों को टालना या सावधानीपूर्वक करना उचित रहेगा।दिशाशूल : आज उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो गुड़ खाकर घर से निकलना शुभ रहेगा। आज का चौघड़िया
- रोग (अशुभ): प्रातः 05:42 से 07:15
- उद्वेग (अशुभ): प्रातः 07:15 से 08:47
- चर (सामान्य): प्रातः 08:47 से 10:20
- लाभ (उन्नति): प्रातः 10:20 से 11:52
- अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 11:52 से 01:25
- काल (हानि): दोपहर 01:25 से 02:58
- शुभ (उत्तम): दोपहर 02:58 से 04:31
- रोग (अशुभ): सायं 04:31 से 06:05।
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
आज का दिन सामान्य रूप से संतुलित है। दोपहर का अभिजीत मुहूर्त विशेष रूप से लाभकारी है, जबकि राहुकाल में सतर्कता आवश्यक है। धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और नए कार्यों की शुरुआत शुभ समय में करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।
