भारतीय सनातन परंपरा में पंचांग का विशेष महत्व है, जो न केवल समय की गणना करता है, बल्कि जीवन के शुभ-अशुभ क्षणों का भी मार्गदर्शन करता है। आज चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। विशेष रूप से आज प्रदोष व्रत होने के कारण भक्तों के लिए यह दिन आध्यात्मिक साधना और पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पंचांग के अनुसार, आज प्रातः 07:09 बजे तक द्वादशी तिथि रहेगी, इसके पश्चात त्रयोदशी तिथि का आरंभ हो जाएगा, जो 31 मार्च 2026 को सुबह 06:55 बजे तक प्रभावी रहेगी। आज का योग ‘शूल’ है, जो सायं 04:51 बजे तक रहेगा। वहीं करण के रूप में प्रातः 07:09 बजे तक ‘बालव’ और उसके बाद सायं 06:59 बजे तक ‘कौलव’ करण प्रभावी रहेगा।
नक्षत्र की दृष्टि से आज चंद्रदेव मघा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो सायं 02:48 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात अन्य नक्षत्र का प्रभाव प्रारंभ होगा। ग्रहों की स्थिति पर नजर डालें तो सूर्य देव मीन राशि में स्थित हैं, जबकि चंद्रदेव कर्क राशि में दोपहर 02:38 बजे तक रहकर इसके बाद सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।
आज का दिन प्रदोष व्रत के कारण विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। प्रदोष काल सायं 06:38 बजे से रात्रि 08:57 बजे तक रहेगा, जो पूजा-अर्चना के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान शिव का अभिषेक और आराधना कर विशेष फल प्राप्त कर सकते हैं।
शुभ कार्यों के लिए आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा, जो अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त अमृत काल दोपहर 12:23 बजे से 01:59 बजे तक रहेगा, जो सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अनुकूल है।
वहीं, दिन के अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल प्रातः 07:47 बजे से 09:20 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगण्ड काल प्रातः 10:53 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक तथा गुलिकाल दोपहर 01:59 बजे से सायं 03:32 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन समयों में शुभ कार्यों से बचना चाहिए।
आज सूर्योदय प्रातः 06:14 बजे हुआ और सूर्यास्त सायं 06:38 बजे होगा। चंद्रमा का उदय सायं 04:16 बजे तथा अस्त प्रातः 05:00 बजे होगा।
कुल मिलाकर, आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदोष व्रत, शुभ मुहूर्तों और अनुकूल ग्रह-नक्षत्रों का यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्य फलदायी सिद्ध हो सकता है। ऐसे में भक्तों को चाहिए कि वे पूरे श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।
