भारतीय संस्कृति में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। दिन की शुरुआत यदि शुभ मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को ध्यान में रखकर की जाए तो कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है। पंचांग न केवल तिथि और नक्षत्र की जानकारी देता है, बल्कि दिन के शुभ-अशुभ समय, राहुकाल और विभिन्न मुहूर्तों के माध्यम से यह भी बताता है कि कौन-सा समय कार्य आरंभ करने के लिए अनुकूल रहेगा। आइए जानते हैं 14 मार्च 2026, शनिवार का विस्तृत पंचांग।
तिथि, वार व संवत : तिथि: चैत्र कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि 15 मार्च 2026 की सुबह 06 बजकर 57 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि आरम्भ हो जाएगी।
वार: शनिवार, विक्रम संवत: 2082, शक संवत: 1947
सूर्योदय: सुबह 05 बजकर 59 मिनट
सूर्यास्त: शाम 06 बजकर 18 मिनट
नक्षत्र, योग व करण : नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा रात्रि 02 बजकर 47 मिनट तक, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग: वरियान योग सुबह 09 बजकर 01 मिनट तक, उसके बाद परिघ योग रहेगा। करण: वव करण के बाद बालव करण।
आज का चौघड़िया
काल (हानि): सुबह 05:59 से 07:29 तक
शुभ (उत्तम): सुबह 07:29 से 08:58 तक
रोग (अशुभ): सुबह 08:58 से 10:28 तक
उद्वेग (अशुभ): सुबह 10:28 से 11:58 तक
चर (सामान्य): दोपहर 11:58 से 01:28 तक
लाभ (उन्नति): दोपहर 01:28 से 02:58 तक
अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 02:58 से 04:28 तक
काल (हानि): शाम 04:28 से 05:58 तक
आज का शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:34 से 12:21 तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:24 से 05:12 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:58 से 02:45 तक
आज का अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: सुबह 08:58 से 10:28 तक
यमगण्ड: दोपहर 01:28 से 02:58 तक
गुलिक काल: सुबह 05:59 से 07:29 तक
दिशाशूल: पूर्व दिशा में यदि इस दिशा में यात्रा करना आवश्यक हो तो अदरक या उड़द का सेवन करके यात्रा प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।
भद्रा काल : भद्रा आरम्भ: 13 मार्च 2026, शुक्रवार को रात्रि 07 बजकर 23 मिनट। भद्रा समाप्त: 14 मार्च 2026, शनिवार को सुबह 08 बजकर 10 मिनट।
इस प्रकार शनिवार, 14 मार्च 2026 का दिन एकादशी तिथि और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रभाव में रहेगा। धार्मिक दृष्टि से एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है और इस दिन व्रत, पूजा-पाठ तथा भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त या लाभ-अमृत चौघड़िया का चयन करना हितकर रहेगा।
