भारतीय परंपरा में पंचांग केवल तिथि और समय का विवरण भर नहीं होता, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन, धार्मिक आस्था और शुभ कार्यों के मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ग्रहों, नक्षत्रों और योगों की स्थिति के आधार पर दिन के शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। आज का दिन वसंत ऋतु के मधुर वातावरण के बीच अनेक ज्योतिषीय संयोग लेकर आया है। आइए जानते हैं आज 12 मार्च 2026, बुधवार का विस्तृत पंचांग।
तिथि, वार और संवत : पंचांग के अनुसार आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रात्रि 02 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा।
वार: बुधवार
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
चन्द्र मास: चैत्र (पूर्णिमांत) / फाल्गुन (अमान्त)
सूर्योदय: सुबह 06:02 बजे
सूर्यास्त: शाम 05:56 बजे
अयन: उत्तरायण ऋतु: वसंत
चंद्रमा, नक्षत्र, योग और करण : आज चंद्रमा दिन के अधिकांश समय वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे और रात्रि में धनु राशि में प्रवेश करेंगे।
नक्षत्र: ज्येष्ठा नक्षत्र रात 08:20 बजे तक रहेगा। इसके बाद मूल नक्षत्र प्रारंभ होगा।
योग: वज्र (व्रज) योग सुबह 07:49 बजे तक रहेगा। इसके बाद सिद्धि योग प्रभावी हो जाएगा।
करण: बालव करण दोपहर 03:08 बजे तक रहेगा। इसके बाद कौलव करण प्रारंभ होगा, जो आगे 12 मार्च की रात्रि तक प्रभावी रहेगा।
आज का शुभ समय (मुहूर्त)
अभिजीत मुहूर्त: आज उपलब्ध नहीं है
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:26 से 05:15 तक
अमृत काल: दोपहर 12:08 से 01:55 तक
ये समय आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और विशेष कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
आज का अशुभ समय
राहुकाल: 11:59 AM से 01:28 PM
यमगण्ड: 07:31 AM से 09:00 AM
गुलिक काल: 10:29 AM से 11:59 AM
इन समयों में महत्वपूर्ण या नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
दिशाशूल : आज उत्तर दिशा में दिशाशूल है। यदि इस दिशा में यात्रा करना अनिवार्य हो तो धनिया या तिल खाकर घर से निकलना शुभ माना जाता है।
आज का चौघड़िया
लाभ (उन्नति): 06:02 AM – 07:31 AM
अमृत (सर्वोत्तम): 07:31 AM – 09:00 AM
काल (हानि): 09:00 AM – 10:29 AM
शुभ (उत्तम): 10:29 AM – 11:59 AM
रोग (अशुभ): 11:59 AM – 01:28 PM
उद्वेग (अशुभ): 01:28 PM – 02:57 PM
चर (सामान्य): 02:57 PM – 04:27 PM
लाभ (उन्नति): 04:27 PM – 05:56 PM
आज का दिन वसंत ऋतु के शुभ प्रभाव के साथ सिद्धि योग के कारण कई कार्यों के लिए अनुकूल माना जा सकता है। हालांकि राहुकाल और अन्य अशुभ समय को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाना अधिक फलदायी रहेगा। धार्मिक अनुष्ठान, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल विशेष रूप से शुभ माने गए हैं।
