आज का दिन सनातन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पूर्णिमांत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आज मासिक शिवरात्रि एवं महाशिवरात्रि का महापर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार दिन भर शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे आज का दिन साधना, जप, तप और पूजन के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
तिथि एवं संवत विवरण
- कृष्ण पक्ष त्रयोदशी – 14 फरवरी सायं 04:01 बजे से 15 फरवरी सायं 05:05 बजे तक
- कृष्ण पक्ष चतुर्दशी – सायं 05:05 बजे से 16 फरवरी सायं 05:34 बजे तक
- विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त)
- शक संवत – 1947 (विश्वावसु)
- मास – फाल्गुन (पूर्णिमांत)
ग्रह-नक्षत्र स्थिति
- चंद्रमा – मकर राशि में संचरण
- सूर्य – कुंभ राशि में स्थित
- नक्षत्र –
- उत्तराषाढ़ा – 14 फरवरी 06:16 PM से 15 फरवरी 07:48 PM तक
- श्रवण – 07:48 PM से 16 फरवरी 08:47 PM तक
विशेष योग एवं पर्व
आज के दिन कई महत्वपूर्ण योगों का संयोग बन रहा है—
- महाशिवरात्रि
- मासिक शिवरात्रि
- भद्रा
- सर्वार्थ सिद्धि योग
- आडल योग
- विडाल योग
इन योगों में किया गया जप-तप एवं शिव पूजन अक्षय फलदायी माना गया है।
महाशिवरात्रि विशेष: चार प्रहर पूजन मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर रात्रि के चार प्रहरों में भगवान शिव का पूजन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- प्रथम प्रहर – शाम 06:11 बजे से रात 09:22 बजे तक
- द्वितीय प्रहर – रात 09:23 बजे से 16 फरवरी, 12:34 बजे तक
- तृतीय प्रहर – 16 फरवरी, रात 12:35 बजे से सुबह 03:46 बजे तक
- चतुर्थ प्रहर – 16 फरवरी, सुबह 03:46 बजे से 06:59 बजे तक
निशिथ काल पूजा मुहूर्त – 16 फरवरी रात्रि 12:09 बजे से 01:01 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:13 बजे से 12:58 बजे तक
शुभ एवं अशुभ काल
शुभ काल
- ब्रह्म मुहूर्त – 05:26 AM – 06:14 AM
- अभिजीत मुहूर्त – 12:13 PM – 12:57 PM
- अमृत काल – 12:59 PM – 02:41 PM
अशुभ काल
- राहुकाल – 04:43 PM – 06:06 PM
- यमगण्ड – 12:35 PM – 01:58 PM
- कुलिक – 03:20 PM – 04:43 PM
- दुर्मुहूर्त – 04:38 PM – 05:22 PM
- वर्ज्यम् – 11:58 PM – 01:38 AM
करण एवं आनंदादि योग
- वणिज – प्रातः 04:38 AM से सायं 05:05 PM तक
- विष्टि – 05:05 PM से 16 फरवरी 05:24 AM तक
- शकुनि – 16 फरवरी 05:24 AM से 05:34 PM तक
आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि वह पावन रात्रि है जब श्रद्धालु उपवास रखकर रात्रि जागरण करते हैं और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और गंगाजल अर्पित करने से समस्त पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धर्माचार्यों के अनुसार, आज सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अभिजीत मुहूर्त में किए गए शुभ कार्य विशेष सफलता प्रदान करते हैं।
(यह पंचांग वैदिक गणनाओं पर आधारित है। स्थान विशेष के अनुसार समय में आंशिक परिवर्तन संभव है।)
