पत्रकारों व यूट्यूबरों पर पर्चे लोकतंत्र का गला घोंटने की नाकाम कोशिश : महेश कुमार आज़ाद

 कालांवाली (सुरेश जोरासिया)। पंजाब सरकार द्वारा पत्रकारों और यूट्यूबरों के विरुद्ध पर्चे दर्ज किया जाना केवल कानून का दुरुपयोग ही नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। सत्ता से सवाल पूछना कोई अपराध नहीं, बल्कि यह लोकतंत्र में नागरिकों और मीडिया का संवैधानिक अधिकार है।

भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री महेश कुमार आज़ाद ने कहा कि यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि भगवंत मान सरकार आलोचनाओं से घबरा रही है और असहमति की आवाज़ों को दबाने का प्रयास कर रही है। पत्रकारों और डिजिटल मीडिया से जुड़े लोगों को डराना, धमकाना और झूठे मुकदमों में फँसाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है, जो तानाशाही सोच को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता सर्वोपरि है और उस पर किसी भी प्रकार का दमन स्वीकार्य नहीं किया जा सकता। सरकार का यह रवैया न केवल निंदनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक भी है।

महेश कुमार आज़ाद ने सरकार से दो-टूक मांग करते हुए कहा,

1. पत्रकारों एवं यूट्यूबरों पर दर्ज सभी पर्चे तुरंत और बिना शर्त वापस लिए जाएँ।

2. मीडिया की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने वाली सभी दमनकारी कार्रवाइयों को तत्काल रोका जाए।

3. इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोकतंत्र में तानाशाही तरीके नहीं चल सकते। जनता, पत्रकार और सोशल मीडिया पर सक्रिय नागरिक लोकतंत्र की रीढ़ हैं और इस रीढ़ को तोड़ने का हर प्रयास नाकाम किया जाएगा।

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