हापुड़ का दर्द: कूड़े के बोझ तले दबता शहर, कब बनेगा स्वच्छ और स्मार्ट?

 आबिद हुसैन, हापुड़। ऐतिहासिक महत्व और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचाना जाने वाला हापुड़ आज स्वच्छता व्यवस्था की गंभीर चुनौती से जूझ रहा है। शहर में स्थायी डंपिंग ग्राउंड न होने के कारण प्रतिदिन एकत्र होने वाला कूड़ा सड़कों पर ही पड़ा रह जाता है। इससे न केवल शहर की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि बदबू और वायु प्रदूषण के कारण आमजन का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।

श्रीगंज रोड की स्थिति चिंताजनक

शहर की प्रमुख सड़कों में शामिल श्रीगंज रोड पर हालात और भी खराब हैं। प्रतिदिन सड़क पर फैला कूड़ा, गंदगी और दुर्गंध से स्थानीय निवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। इस मार्ग पर कई पॉश कॉलोनियां स्थित हैं और अधिकारी व वीआईपी भी रोजाना इसी रास्ते से गुजरते हैं, बावजूद इसके स्थिति में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा। नगर पालिका परिषद हापुड़ के अधिशासी अधिकारी संजय मिश्रा की दूसरी बार तैनाती के बाद भी अपेक्षित बदलाव नहीं दिखा है।

स्वच्छता कर्मियों का परिश्रम, व्यवस्था की कमी

यह उल्लेखनीय है कि नगर पालिका परिषद हापुड़ के सफाई कर्मचारी दिन-रात कड़ी मेहनत कर शहर को स्वच्छ रखने का प्रयास कर रहे हैं। ठंड हो या गर्मी, वे ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। लेकिन स्थायी डंपिंग ग्राउंड के अभाव में कूड़ा अस्थायी कूड़ा घरों में जमा हो जाता है, जो अंततः सड़कों पर दिखाई देने लगता है।

क्या यही स्मार्ट सिटी की राह है?

प्रश्न उठता है कि क्या हापुड़ को स्मार्ट शहर बनाने के लिए यह सही समय नहीं है? क्या प्रशासन और नागरिक मिलकर ठोस कदम नहीं उठा सकते? स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनसहभागिता से ही स्थायी समाधान संभव है।

आह्वान : हापुड़ के नागरिकों को अपने शहर के लिए आगे आना होगा और प्रशासन को जागरूक करना होगा। ठोस कचरा प्रबंधन, डंपिंग ग्राउंड की स्थापना और नियमित निगरानी जैसे कदम उठाकर ही हापुड़ को स्वच्छ, सुंदर और स्मार्ट बनाया जा सकता है

क्या आप हापुड़ को स्मार्ट शहर बनाने के लिए तैयार हैं?

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