कागदाना में इफको की फसल विचार गोष्ठी आयोजित, नैनो उर्वरकों व ड्रोन तकनीक से खेती की लागत घटाने पर दिया जोर

-किसानों को नैनो तरल यूरिया, जैव उर्वरक व फार्मर आईडी के प्रति किया गया जागरूक

सिरसा,कालांवाली (हरविन्द्र सिंह गिल)। विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको द्वारा वीरवार को जिला के गांव कागदाना में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “फसल विचार गोष्ठी एवं निःशुल्क कंबल वितरण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। गांव कागदाना की ओर से नंबरदार दलीप सिंह एवं पूर्व जिला पार्षद राम सिंह बैनीवाल द्वारा मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम के समापन पर 300 जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कंबल वितरित किए गए, जबकि कार्यक्रम में 500 से अधिक किसानों ने शिरकत की।

इफको के निदेशक चौ. प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुखदेव कंबोज ने की, जबकि कपास अनुसंधान केंद्र से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ऋषि कुमार बतौर विशिष्ट अतिथि रहे।

इसके अलावा कार्यक्रम में सहायक महाप्रबंधक नाबार्ड स्वर्दीप सिंह, कोऑपरेटिव सोसाइटी के सहायक रजिस्ट्रार संजीव कौशिक, इफको चंडीगढ़ से निरंजन सिंह; इफको फतेहाबाद से क्षेत्रीय अधिकारी संदीप, क्षेत्रीय अधिकारी साहिल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इफको नई दिल्ली के निदेशक चौ. प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।  जैव उर्वरक सागरिका एवं नैनो उर्वरकों के प्रयोग से रासायनिक खादों की मात्रा लगभग 50 प्रतिशत तक कम की जा सकती है। इससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, खेती की लागत में कमी, उत्पादन में वृद्धि तथा फसलों की गुणवत्ता में सुधार संभव है। उन्होंने कृषि में ड्रोन के माध्यम से कृषि आदानों के छिड़काव को भी एक बेहतर विकल्प बताया, जिससे श्रम और लागत दोनों में कमी आती है।इफको चंडीगढ से कृषि सेवाएं निरंजन सिंह ने किसानों को इफको के नैनो एवं विशिष्ट उर्वरकों के सही उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कृषि में ड्रोन तकनीक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इफको उत्पादों के प्रयोग से किसान खेती की लागत घटाकर पैदावार बढ़ा सकते हैं। उन्होंने जैव उर्वरकों को भविष्य की खेती के लिए एक बेहतर विकल्प बताया।

उपनिदेशक डॉ. सुखदेव कंबोज ने नैनो तरल यूरिया को एक उत्कृष्ट उत्पाद बताते हुए किसानों को इसके प्रयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इससे मृदा स्वास्थ्य के साथ-साथ देश की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही फार्मर आईडी योजना के तहत पंजीकरण कराने के लिए किसानों को जागरूक किया।विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ वैज्ञानिक, कपास अनुसंधान केंद्र, सिरसा डॉ. ऋषि कुमार ने आगामी कपास फसल की नवीनतम किस्मों एवं गुलाबी सुंडी की रोकथाम के संबंध में किसानों के साथ महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

नाबार्ड से सहायक महाप्रबंधक स्वर्दीप सिंह ने जिले में संचालित नाबार्ड की विभिन्न गतिविधियों एवं किसानों के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी दी। वहीं सहायक रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटी, सिरसा संजीव कौशिक ने जिले में कोऑपरेटिव क्षेत्र की नई योजनाओं एवं गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर इफको-एमसी सतीश राणा ने रबी फसलों में कीट प्रबंधन से संबंधित उपयोगी जानकारी प्रदान की।

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