आज़ चबूतरा बनाया है, कल चौखट लग जायेगी

निगम की गांधारी दे रही है अतिक्रमण को बढ़ावा


फिरोजाबाद। गांधारी ने अपने पति धृतराष्ट्र के जन्मांध होने के कारण उनके दुख को आत्मसात करने और उनके प्रति त्याग की भावना से आंखों पर पट्टी बांध ली थी, लेकिन शहर के नगर निगम ने गांधी की चकाचौंध के चलते अपनी आंखों पर ऐसी पट्टी बांध ली है कि शहर के सुभाष तिराहे से लेकर एस.एन. रोड तक बने नव-निर्मित फुटपाथों पर अतिक्रमणों का अंबार लग गया है। इंतिहा तो तब हो गई जब अनाधिकृत रूप से निर्माण करने वालों ने निगम के फुटपाथ पर भी आरसीसी के चबूतरे का अवैध निर्माण करा दिया।

अनाधिकृत रूप से फुटपाथ पर चबूतरे के रूप में अतिक्रमण होते देख आते-जाते लोग यही कहते नजर आए कि क्या निगम अंधा हो गया है? आज चबूतरा बनाया है तो कल चौखट भी लगा लेंगे, क्योंकि कागज के गांधी में तो बहुत ताकत है।

आम लोगों के जीवन को सुदृढ़ और स्वस्थ वातावरण देने के उद्देश्य से सरकार ने नगर निगमों की स्थापना की थी, क्योंकि निगम का कंट्रोल आईएएस स्तर के सर्वोच्च ज्ञान को अर्जित करने वाले, आमजन के सुख-दुख और उनके हितों एवं अधिकारों को समझने वालों के हाथों में होता है। लेकिन फिरोजाबाद नगर निगम में शायद ऐसा होता प्रतीत नहीं होता।

बल्कि ऐसा लगता है कि पूरा निगम ही चांदी की रोशनी में नहाया हुआ है। यही वजह है कि निगम को जन्मे 11 वर्ष बीतने के बाद भी गरीबों और श्रमिकों की बस्तियों में नालियों की जलनिकासी न होने के कारण गंदगी के लगे ढेर दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं, निगम का जल निगम आज भी पूरे नगर की तो छोड़िए, जल निगम के 500 मीटर के दायरे में भी 24 घंटे निर्बाध जलापूर्ति करने में पूरी तरह असमर्थ है।

कभी टंकी साफ कराने के नाम पर तो कभी लाइट न होने के नाम पर, इतना ही नहीं कभी-कभी तो जेट झाड़ की सफाई के नाम पर जलापूर्ति बाधित होना बता दी जाती है। संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों को इतनी भी जानकारी नहीं रहती कि जलापूर्ति किन-किन क्षेत्रों में हो रही है।

इतना ही नहीं, टैक्स विभाग में भी कुछ इसी तरह का जंगलराज कायम है कि लोगों के नाम-पते ही नहीं बल्कि एसआईआर की तरह क्षेत्रों के नाम तक गलत लिख दिए गए हैं।

अगर अतिक्रमण की बात करें तो सुभाष तिराहे से लेकर जल निगम तक दोनों ओर फुटपाथों पर अतिक्रमण बना रहता है। इसी तरह कंपनी बाग चौराहे से लेकर स्टेशन तक जाने वाली एस.एन. रोड के दोनों ओर विद्युत विभाग से लेकर अन्य अतिक्रमणकारियों ने इस तरह अतिक्रमण कर रखा है। ऐसा ही हाल पूरे सदर बाजार में बना हुआ है, जहां सड़क पर जाम की स्थिति में स्कूली छात्र-छात्राएं फुटपाथ पर चलकर अपनी राह पूरी नहीं कर पाते और जाम लगना आम बात हो गई है।

हद तो तब हो गई जब एस.एन. रोड स्थित दाऊजी स्वीट्स भंडार के सामने प्रिंस ग्लास के बाहर आते-जाते लोगों ने देखा कि फुटपाथ पर ही लोहे का जाल डालकर आरसीसी का चबूतरा बनाया जा रहा है, जो सीधे तौर पर निगम और उससे संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही को दर्शाता है।

लोगों का मानना था कि शहर के पिता कहलाने का दावा करने वाले निगम ने नगरवासियों के दुख को आत्मसात करने की तो छोड़िए, इसने तो जनता के हितों और अधिकारों को अनदेखा करने के लिए चांदी की चकाचौंध की ऐसी पट्टी आंखों पर बांध रखी है कि आमजन के रास्तों में भी अवरोध उत्पन्न करा दिए गए हैं।

देखना यह है कि क्या अब नगर निगम आमजन, स्कूली छात्र-छात्राओं को फुटपाथों से सुरक्षित गुजरने के लिए अतिक्रमणों को साफ करा पाएगा या नहीं? या फिर कागज के गांधी के बल पर इसी तरह अतिक्रमण होता रहेगा?

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