24 अक्टूबर 2026 का पंचांग: त्रयोदशी के बाद लगेगी चतुर्दशी, जानिए शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

 आज आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र और व्याघात योग का संयोग; अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्यों की शुरुआत करना रहेगा अनुकूल

 हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। दिन की शुरुआत से लेकर पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्यों की योजना बनाने तक पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ समय की जानकारी प्राप्त की जाती है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। दोपहर 1 बजकर 36 मिनट तक त्रयोदशी रहने के बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। आज उत्तर भाद्रपद नक्षत्र रात 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद रेवती नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं, व्याघात योग रात 8 बजकर 1 मिनट तक रहेगा और इसके बाद हर्षण योग शुरू हो जाएगा। चंद्रमा पूरे दिन मीन राशि में विराजमान रहेंगे।

शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से शनि देव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शनि देव की पूजा-अर्चना, जरूरतमंदों को दान और सेवा जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से की गई उपासना व्यक्ति को मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करती है। हालांकि, किसी भी शुभ कार्य के लिए समय निर्धारित करते समय स्थानीय पंचांग और कार्य की प्रकृति का ध्यान रखना आवश्यक है।

आज का पंचांग

- दिन: शनिवार

- तारीख: 24 अक्टूबर 2026

- मास: आश्विन

- पक्ष: शुक्ल पक्ष

- तिथि: त्रयोदशी दोपहर 1:36 बजे तक, इसके बाद चतुर्दशी

- नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद रात 8:32 बजे तक, इसके बाद रेवती

- योग: व्याघात रात 8:01 बजे तक, इसके बाद हर्षण

- चंद्र राशि: मीन

- सूर्योदय: सुबह 6:19 बजे

- सूर्यास्त: शाम 5:32 बजे

आज के शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और अन्य मांगलिक कार्य करना अनुकूल माना जाता है। 24 अक्टूबर को दिन के प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं।

- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:37 बजे से 5:28 बजे तक

- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:33 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक

- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:48 बजे से 2:32 बजे तक

- अमृत काल: दोपहर 3:50 बजे से शाम 5:24 बजे तक

इन मुहूर्तों का उपयोग पूजा-पाठ, ध्यान, मंत्र जाप और उपयुक्त धार्मिक कार्यों के लिए किया जा सकता है। विशेष मांगलिक कार्यों के लिए संबंधित कार्य की प्रकृति के अनुसार पंचांग का विचार करना उचित रहता है।

आज राहुकाल और अशुभ समय

पंचांग में राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल को परंपरागत रूप से अशुभ समय की श्रेणी में रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन अवधियों में नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचा जाता है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और दैनिक धार्मिक गतिविधियों पर इसका सामान्यतः निषेध नहीं माना जाता।

- राहुकाल: सुबह 9:07 बजे से 10:31 बजे तक

- यमगंड काल: दोपहर 1:20 बजे से 2:44 बजे तक

- गुलिक काल: सुबह 6:19 बजे से 7:43 बजे तक

शनिवार को शनि देव की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन शनि मंदिर में दर्शन करते हैं, जरूरतमंदों की सहायता करते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में सेवा, संयम, ईमानदारी और कर्म के प्रति निष्ठा को विशेष महत्व दिया गया है।

इस दिन शनि देव का स्मरण करते हुए व्यक्ति को अपने व्यवहार में विनम्रता रखने, दूसरों के प्रति न्यायपूर्ण आचरण करने और जरूरतमंदों की सहायता करने का संकल्प लेना चाहिए। धार्मिक आस्था के साथ अच्छे कर्मों को जीवन में अपनाना ही पूजा के व्यापक संदेश को सार्थक बनाता है।

विशेष सूचना: पंचांग में दिए गए समय स्थानीय सूर्योदय, भौगोलिक स्थिति और गणना-पद्धति के अनुसार बदल सकते हैं। धार्मिक अनुष्ठान या विशेष मांगलिक कार्य करने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लेना उचित है।

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