शारदीय नवरात्रि के अंतिम चरण में मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना का विशेष महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। महानवमी के अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना, हवन और कन्या पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की उपासना से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ शुभ-अशुभ समय और पंचांग की जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
तिथि और नक्षत्र: हिंदू पंचांग के अनुसार, मंगलवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि आरंभ होगी। दिन में धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। शूल योग रात्रि 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा, इसके बाद गंड योग आरंभ होगा। करण कौलव रहेगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त: मंगलवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर तथा सूर्यास्त शाम 5 बजकर 53 मिनट पर होगा।
शुभ मुहूर्त: किसी शुभ कार्य के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह 6 बजकर 34 मिनट से 8 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 53 मिनट से 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।
अशुभ काल: राहुकाल दोपहर 3 बजकर 2 मिनट से शाम 4 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। कुलिक काल दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 1 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 46 मिनट से 9 बजकर 32 मिनट तक तथा रात्रि 10 बजकर 56 मिनट से 11 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। वर्ज्य काल रात्रि 10 बजकर 20 मिनट से अगले दिन मध्यरात्रि 12 बजकर 3 मिनट तक रहेगा।
महानवमी का धार्मिक महत्व: नवरात्रि की नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। श्रद्धालु माता को फल, फूल, नैवेद्य और चुनरी अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कई घरों और मंदिरों में कन्या पूजन तथा हवन का आयोजन किया जाता है। इस दिन श्रद्धा, सेवा, संयम और जरूरतमंदों की सहायता को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
