शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ आज, बुधवार, 21 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के अवसर पर नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन कर भक्त भावपूर्ण विदाई देते हैं। कई स्थानों पर जयंती विसर्जन की परंपरा भी निभाई जाती है। विजयादशमी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना, नए कार्यों का शुभारंभ और भगवान का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है।
तिथि और पंचांग विवरण: आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, दशमी तिथि दोपहर 2 बजकर 12 मिनट तक रहेगी, इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ होगी। आज गण्ड योग रात्रि 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद वृद्धि योग शुरू होगा। धनिष्ठा नक्षत्र शाम 7 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रारंभ होगा।
- दिन: बुधवार
- मास: आश्विन
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: दशमी दोपहर 2:12 बजे तक, इसके बाद एकादशी
- नक्षत्र: धनिष्ठा शाम 7:33 बजे तक
- योग: गण्ड रात्रि 12:33 बजे तक, फिर वृद्धि
- प्रथम करण: गर दोपहर 2:12 बजे तक
- द्वितीय करण: वणिज रात्रि 2:32 बजे तक (22 अक्टूबर)
आज के शुभ मुहूर्त
विजयादशमी के अवसर पर शुभ समय में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करना विशेष महत्व रखता है। आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 से 5:38 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 2:33 बजे से शाम 4:14 बजे तक
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
- सूर्योदय: सुबह 6:29 बजे
- सूर्यास्त: शाम 5:41 बजे
- चंद्रोदय: दोपहर 2:50 बजे
- चंद्रास्त: रात्रि 1:25 बजे (22 अक्टूबर)
आज के अशुभ मुहूर्त
धार्मिक कार्यों के लिए मुहूर्त का विचार करते समय राहुकाल, गुलिक काल और यमगण्ड को ध्यान में रखा जाता है। आज इनका समय इस प्रकार है:
- गुलिक काल: सुबह 10:41 से दोपहर 12:05 बजे तक
- राहुकाल: दोपहर 12:05 से 1:29 बजे तक
- यमगण्ड: सुबह 7:53 से 9:17 बजे तक
बुधवार का दिन का चौघड़िया
- लाभ: सुबह 6:28 से 7:52 बजे तक
- अमृत: सुबह 7:52 से 9:16 बजे तक
- काल: सुबह 9:16 से 10:40 बजे तक
- शुभ: सुबह 10:40 से दोपहर 12:04 बजे तक
- रोग: दोपहर 12:04 से 1:28 बजे तक
- उद्वेग: दोपहर 1:28 से 2:52 बजे तक
- चर: दोपहर 2:52 से शाम 4:16 बजे तक
- लाभ: शाम 4:16 से 5:40 बजे तक
बुधवार की रात का चौघड़िया
- उद्वेग: शाम 5:40 से 7:16 बजे तक
- शुभ: शाम 7:16 से 8:52 बजे तक
- अमृत: रात 8:52 से 10:29 बजे तक
- चर: रात 10:29 से 12:05 बजे तक
- रोग: रात 12:05 से 1:41 बजे तक
- काल: रात 1:41 से 3:17 बजे तक
- लाभ: सुबह 3:17 से 4:53 बजे तक
- उद्वेग: सुबह 4:53 से 6:29 बजे तक
विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि अन्याय, अहंकार और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। इस दिन शस्त्र पूजन, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है।
मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ शारदीय नवरात्रि के उत्सव का समापन होता है। भक्त मां को अगले वर्ष पुनः आने का निमंत्रण देते हुए भावपूर्ण विदाई देते हैं। मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों को सुख, समृद्धि, शक्ति और साहस का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
नोट: पंचांग के समय स्थान और गणना पद्धति के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग और पुरोहित से समय की पुष्टि कर लें।
