04 अक्टूबर 2026 का पंचांग: मातृ नवमी पर आज होगा मातृ पितरों का श्राद्ध, रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि आज विशेष धार्मिक महत्व लेकर आई है। पितृ पक्ष के क्रम में रविवार, 04 अक्टूबर को मातृ नवमी का श्राद्ध किया जाएगा। इस दिन विशेष रूप से माता, मातामही तथा मातृ पक्ष के अन्य दिवंगत पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। मान्यता है कि मातृ नवमी के दिन विधि-विधान से किया गया श्राद्ध मातृ पक्ष के पितरों की संतुष्टि और उनके आशीर्वाद का माध्यम बनता है। इसी दिन जितिया व्रत का पारण भी किया जाएगा।

आज नवमी तिथि देर रात 03 बजकर 53 मिनट तक रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि का आरंभ होगा। नक्षत्र की स्थिति भी दिन को विशेष बना रही है। पुनर्वसु नक्षत्र रात्रि 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा और इसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। पुष्य नक्षत्र के आरंभ के साथ ही 05 अक्टूबर की मध्यरात्रि के बाद रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बनेगा, जो प्रातः 06 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों तथा विशेष साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

आज का दिन मातृ नवमी श्राद्ध के कारण पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। जिन परिवारों में माता अथवा मातृ पक्ष के किसी पितर की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, वहां भी परंपरा के अनुसार मातृ नवमी के दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है। श्राद्ध के दौरान पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन तथा यथाशक्ति दान करने की परंपरा है। माना जाता है कि पितरों के प्रति श्रद्धा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि परिवार की उन जड़ों को याद करने का अवसर है, जिनसे वर्तमान पीढ़ी को जीवन, संस्कार और परंपराएं मिली हैं।

आज की तिथि और नक्षत्र के अनुसार कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि रात्रि 03 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू होगी। पुनर्वसु नक्षत्र रात्रि 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पुष्य नक्षत्र लगेगा। करण में तैतिल करण शाम 04 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, फिर गर करण रात्रि 03 बजकर 53 मिनट तक रहेगा और इसके बाद वणिज करण शुरू होगा। परिघ योग दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, इसके बाद शिव योग का आरंभ होगा। आज का पक्ष कृष्ण पक्ष और वार रविवार है।

चंद्र राशि की बात करें तो चंद्रमा आज शाम 06 बजकर 31 मिनट तक मिथुन राशि में रहेगा, इसके बाद कर्क राशि में प्रवेश करेगा। सूर्योदय सुबह 06 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 06 बजकर 04 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात्रि 12 बजकर 40 मिनट पर, यानी 05 अक्टूबर को होगा, जबकि चंद्रास्त दोपहर 01 बजकर 58 मिनट पर होगा।

मातृ नवमी के श्राद्ध के लिए आज कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 01 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। श्राद्ध कर्म में कुतुप और रौहिण मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है। पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और अन्य श्राद्ध कर्म इन शुभ समयों में करना विशेष फलदायी माना जाता है।

आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त में ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 38 मिनट से 05 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 08 मिनट से 02 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात्रि 09 बजकर 57 मिनट से 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 45 मिनट से 05 अक्टूबर की मध्यरात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग 05 अक्टूबर की मध्यरात्रि 12 बजकर 13 मिनट से प्रातः 06 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में पुष्य नक्षत्र और रविवार का संयोग बनने से रवि पुष्य योग बनता है। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग भी इसी अवधि में रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस योग में किए गए शुभ कार्यों में सफलता की संभावनाएं बढ़ती हैं।

दिन के शुभ चौघड़िया में चर-सामान्य सुबह 07 बजकर 44 मिनट से 09 बजकर 13 मिनट तक, लाभ-उन्नति 09 बजकर 13 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक, अमृत-सर्वोत्तम 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक तथा शुभ-उत्तम दोपहर 01 बजकर 38 मिनट से 03 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।

रात्रि के शुभ चौघड़िया में शुभ-उत्तम शाम 06 बजकर 04 मिनट से 07 बजकर 35 मिनट तक, अमृत-सर्वोत्तम 07 बजकर 35 मिनट से 09 बजकर 07 मिनट तक और चर-सामान्य 09 बजकर 07 मिनट से 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इसके बाद 05 अक्टूबर की रात में लाभ-उन्नति का समय रात्रि 01 बजकर 41 मिनट से 03 बजकर 13 मिनट तक तथा शुभ-उत्तम प्रातः 04 बजकर 44 मिनट से 06 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

आज के अशुभ समय में यमगंड दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 03 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 35 मिनट तक और राहुकाल शाम 04 बजकर 35 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त अपराह्न 04 बजकर 29 मिनट से शाम 05 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा।

मातृ नवमी का दिन केवल श्राद्ध कर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मां और मातृ पक्ष के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है। भारतीय परंपरा में माता को प्रथम गुरु माना गया है और मातृ ऋण को जीवन के महत्वपूर्ण ऋणों में स्थान दिया गया है। इसलिए आज पितरों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक तर्पण और श्राद्ध कर्म करने के साथ जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या यथाशक्ति दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। वहीं जितिया व्रत रखने वाली महिलाएं आज विधि-विधान से व्रत का पारण करेंगी। इस प्रकार पितृ स्मरण, मातृ श्रद्धा और पारिवारिक मंगल की भावना से जुड़ा आज का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

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