आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ आज का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष है। पितृ पक्ष के क्रम में आने वाली यह तिथि श्रद्धा, संयम और पूर्वजों के स्मरण का संदेश देती है। दिनभर चतुर्थी तिथि का प्रभाव रहने के बाद दोपहर में पंचमी तिथि का आरंभ होगा। वहीं नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि में होने वाले परिवर्तन के कारण दिन के अलग-अलग समय का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व भी बदलता रहेगा। ऐसे में शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का ध्यान रखना उपयोगी माना जाता है।
30 सितंबर 2026 का पंचांग के अनुसार आज आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 02 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। आज भरणी नक्षत्र प्रातः 07 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद कृत्तिका नक्षत्र का आरंभ होगा। इस प्रकार दिन के प्रथम प्रहर में भरणी और उसके बाद कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।
आज वज्र योग मध्यरात्रि के बाद 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके पश्चात सिद्धि योग का आरंभ होगा। वहीं बालव करण दोपहर 02 बजकर 55 मिनट तक रहेगा और इसके बाद कौलव करण प्रारंभ होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा दोपहर 01 बजकर 13 मिनट तक मेष राशि में रहेगा, इसके बाद वृषभ राशि में प्रवेश करेगा।
आज सूर्यदेव प्रातः 06 बजकर 13 मिनट पर उदित होंगे और सायं 06 बजकर 08 मिनट पर अस्त होंगे। चंद्रमा का उदय रात्रि 08 बजकर 30 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन प्रातः 09 बजकर 48 मिनट पर होगा।
आज के शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है। वहीं अमृत काल अगले दिन यानी 1 अक्टूबर को तड़के 03 बजकर 48 मिनट से प्रातः 05 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। दिन के चौघड़िया में लाभ का समय सुबह 06 बजकर 13 मिनट से 07 बजकर 43 मिनट तक, अमृत सुबह 07 बजकर 43 मिनट से 09 बजकर 12 मिनट तक, काल सुबह 09 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक और शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
वहीं अशुभ मुहूर्त में आज राहुकाल दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक और यमगंड सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में महत्वपूर्ण शुभ कार्यों का आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है।
आज का पंचांग केवल तिथि और नक्षत्र की जानकारी नहीं देता, बल्कि दिनचर्या को शुभ-अशुभ समय के अनुसार व्यवस्थित करने का पारंपरिक आधार भी माना जाता है। आश्विन कृष्ण पक्ष में पितरों के स्मरण, तर्पण और श्रद्धा से जुड़े कर्मों का विशेष महत्व माना गया है। इसलिए आज के दिन श्रद्धा और सात्विक भाव के साथ धार्मिक कर्म करना शुभ माना जाता है।
