खबर मार्निंग : भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा आज शनिवार को है। सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इसी के साथ भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष का समापन होगा और रात 10 बजकर 18 मिनट के बाद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु स्नान, दान, पूजा-पाठ और चंद्रमा को अर्घ्य देकर पुण्य की कामना करेंगे। वहीं, पितृ पक्ष के आरंभ के कारण आज का दिन पूर्वजों के स्मरण और उनके निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कर्मों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात 11 बजकर 06 मिनट से शुरू हुई है, जो 26 सितंबर की रात 10 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 5 बजकर 58 मिनट पर होगा। श्रद्धालु चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
आज पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र दोपहर 11 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का आरंभ होगा, जो पूरी रात्रि रहेगा। गण्ड योग दोपहर 1 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, इसके बाद वृद्धि योग शुरू होगा। वहीं विष्टि करण प्रातः 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद बव करण का आरंभ होगा। चंद्रमा दिन-रात मीन राशि में संचार करेगा।
सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 11 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 13 मिनट पर होगा। आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। अमृत काल उपलब्ध नहीं है। वर्ज्यम् काल रात 8 बजकर 58 मिनट से रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।
आज के चौघड़िया में प्रातः 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक काल चौघड़िया रहेगा। इसके बाद सुबह 7 बजकर 42 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक शुभ चौघड़िया रहेगा। सुबह 9 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक रोग चौघड़िया और 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक उद्वेग चौघड़िया रहेगा।
आज राहुकाल सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक और यमगंड दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों के लिए इन अशुभ कालखंडों से बचने का प्रयास किया जाता है।
भाद्रपद पूर्णिमा के प्रमुख समय: पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात 11:06 बजे शुरू होकर 26 सितंबर की रात 10:18 बजे समाप्त होगी। चंद्रोदय शाम 5:58 बजे होगा। ऐसे में श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूर्णिमा पूजा, चंद्र अर्घ्य तथा पितृ संबंधी धार्मिक कर्म कर सकते हैं।
