24 सितंबर 2026 का पंचांग : गुरु प्रदोष पर बन रहे शुभ संयोग, पूरे दिन रहेगा पंचक

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के साथ आज 24 सितंबर 2026 को गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। आज गुरु प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। त्रयोदशी तिथि रात्रि 11 बजकर 18 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के लिए शाम 6 बजकर 16 मिनट से रात 8 बजकर 39 मिनट तक का समय बताया गया है। वहीं, चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव बना रहेगा। आज पूरे दिन पंचक भी रहेगा।

पंचांग के अनुसार आज धनिष्ठा नक्षत्र, धृति योग और कौलव करण का संयोग है। धृति योग दोपहर 3 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, इसके बाद शूल योग प्रारंभ होगा। वहीं रवि योग सुबह 10 बजकर 35 मिनट से प्रभावी होगा। कौलव करण प्रातः 11 बजकर 09 मिनट तक रहेगा, इसके बाद तैतिल करण का आरंभ होगा। आज दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

तिथि और नक्षत्र की बात करें तो त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर की रात 10 बजकर 50 मिनट से शुरू हुई है और 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव बना रहेगा। चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा। आज पूरे दिन पंचक रहेगा।

सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार आज सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 10 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 16 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 4 बजकर 57 मिनट पर तथा चंद्रास्त मध्यरात्रि के बाद 4 बजकर 33 मिनट पर, यानी 25 सितंबर को होगा।

आज के शुभ मुहूर्त में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। अमृत काल 25 सितंबर को तड़के 3 बजकर 56 मिनट से प्रातः 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। गुरु प्रदोष पूजा के लिए शाम 6 बजकर 16 मिनट से रात 8 बजकर 39 मिनट तक का समय रहेगा।

आज के चौघड़िया के अनुसार शुभ चौघड़िया सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इसके बाद रोग चौघड़िया सुबह 7 बजकर 41 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक, उद्वेग चौघड़िया सुबह 9 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक तथा चर चौघड़िया सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

वहीं अशुभ मुहूर्त में राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक और यमगंड सुबह 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इन अवधियों में शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है।

गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु प्रदोष काल में स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान शिव का जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और दीप अर्पित कर सकते हैं। शिव मंत्रों का जाप तथा शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ भी किया जाता है। हालांकि पूजा-विधि और मुहूर्त का पालन स्थानीय परंपरा तथा स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।

24 सितंबर 2026 के प्रमुख पंचांग विवरण

  • वार: गुरुवार

  • मास: भाद्रपद

  • पक्ष: शुक्ल पक्ष

  • तिथि: त्रयोदशी रात 11:18 बजे तक, इसके बाद चतुर्दशी

  • त्रयोदशी प्रारंभ: 23 सितंबर रात 10:50 बजे

  • नक्षत्र: धनिष्ठा

  • योग: धृति दोपहर 3:55 बजे तक, इसके बाद शूल

  • रवि योग: सुबह 10:35 बजे से

  • करण: कौलव सुबह 11:09 बजे तक, इसके बाद तैतिल

  • चंद्र राशि: कुंभ

  • पंचक: पूरे दिन

  • दिशाशूल: दक्षिण दिशा

  • सूर्योदय: सुबह 6:10 बजे

  • सूर्यास्त: शाम 6:16 बजे

  • चंद्रोदय: शाम 4:57 बजे

  • चंद्रास्त: 25 सितंबर तड़के 4:33 बजे

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक

  • अमृत काल: 25 सितंबर तड़के 3:56 बजे से सुबह 5:35 बजे तक

  • गुरु प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 6:16 बजे से रात 8:39 बजे तक

  • राहुकाल: दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक

  • गुलिक काल: सुबह 9:00 बजे से 10:30 बजे तक

  • यमगंड: सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक।

Post a Comment

Previous Post Next Post