खबर मार्निंग। रविवार, 27 सितंबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का संयोग बन रहा है। प्रतिपदा तिथि रात 08 बजकर 58 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि का आरंभ होगा। आज उत्तर भाद्रपद नक्षत्र सुबह 11 बजकर 08 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद रेवती नक्षत्र प्रारंभ होगा। चंद्रमा आज मीन राशि में संचार करेंगे। दिन में सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अमृत काल और अभिजीत मुहूर्त जैसे शुभ समय भी बन रहे हैं। वहीं पंचक पूरे दिन रहेगा तथा रविवार को पश्चिम दिशा का दिशाशूल माना गया है। ऐसे में शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले आज के पंचांग और मुहूर्त का ध्यान रखना विशेष उपयोगी रहेगा।
आज की तिथि, नक्षत्र और योग
तिथि: आश्विन कृष्ण प्रतिपदा रात 08:58 बजे तक, इसके बाद द्वितीया
नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद सुबह 11:08 बजे तक, फिर रेवती
करण: बालव सुबह 09:41 बजे तक, कौलव रात 08:58 बजे तक, इसके बाद तैतिल
योग: वृद्धि सुबह 11:17 बजे तक, फिर ध्रुव योग
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय-चंद्रास्त
सूर्योदय: सुबह 06:12 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:12 बजे
चंद्रोदय: शाम 06:29 बजे
चंद्रास्त: सुबह 06:32 बजे
आज के शुभ मुहूर्त और योग
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:36 बजे से 05:24 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:12 बजे से 11:08 बजे तक
अमृत काल: सुबह 06:24 बजे से 07:59 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:12 बजे से 03:00 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:48 बजे से 12:36 बजे तक, 28 सितंबर
दिन का शुभ चौघड़िया
चर-सामान्य: सुबह 07:42 बजे से 09:12 बजे तक
लाभ-उन्नति: सुबह 09:12 बजे से 10:42 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम: सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:12 बजे तक
शुभ-उत्तम: दोपहर 01:42 बजे से 03:12 बजे तक
रात का शुभ चौघड़िया
शुभ-उत्तम: शाम 06:12 बजे से 07:42 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम: शाम 07:42 बजे से रात 09:12 बजे तक
चर-सामान्य: रात 09:12 बजे से 10:42 बजे तक
लाभ-उन्नति: रात 01:42 बजे से 03:12 बजे तक, 28 सितंबर
शुभ-उत्तम: सुबह 04:42 बजे से 06:12 बजे तक, 28 सितंबर
आज के अशुभ समय
गुलिक काल: दोपहर 03:12 बजे से शाम 04:42 बजे तक
दुर्मुहूर्त: शाम 04:36 बजे से 05:24 बजे तक
राहुकाल: शाम 04:42 बजे से 06:12 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 12:12 बजे से 01:42 बजे तक
पंचक: पूरे दिन
दिशाशूल: पश्चिम दिशा
आज का शिववास : आज शिववास गौरी के साथ रात 08:58 बजे तक रहेगा। इसके बाद शिववास सभा में रहेगा।
आश्विन कृष्ण पक्ष की शुरुआत के साथ ही धार्मिक दृष्टि से यह समय आत्मचिंतन, संयम, पितरों के स्मरण और आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार शुभ योगों के दौरान किए गए धार्मिक एवं मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त का विचार किया जाता है, जबकि राहुकाल, गुलिक काल, यमगण्ड और दुर्मुहूर्त जैसे समय में महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचने की परंपरा रही है। पंचक पूरे दिन रहने के कारण भी किसी विशेष कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त का विचार करना उचित रहेगा।
