-शिवभक्ति के रंग में रंगा श्रावण, भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व बांधेगा रिश्तों की डोर
विनोद कुमार झा खबर मार्निंग , धर्म डेस्क
श्रावण न की फुहारों में जब हर ओर हरियाली मुस्कुराती है, मंदिरों में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते हैं और कांवड़ियों के कदम भोलेनाथ की भक्ति में आगे बढ़ते हैं, तब लगता है जैसे प्रकृति स्वयं भगवान शिव की आराधना में लीन हो गई हो। सावन केवल कैलेंडर का एक महीना नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम, तपस्या और भक्ति का ऐसा संगम है, जिसमें हर मन भगवान शिव के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देता है।
अमावस्या के साथ श्रावण कृष्ण पक्ष का समापन हो गया है और अब श्रावण शुक्ल पक्ष की शुरुआत के साथ सावन अपने अगले पड़ाव में प्रवेश कर चुका है। यानी सावन का आधा महीना बीत गया है और अब इस पावन मास का शेष आधा भाग धार्मिक और पारिवारिक उत्सवों की आहट लेकर आया है। इसी शुक्ल पक्ष में भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन मनाया जाएगा।
कृष्ण पक्ष की साधना के बाद शुक्ल पक्ष में उत्सवों की आहट
श्रावण कृष्ण पक्ष में जहां श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना, व्रत, उपवास और जलाभिषेक के माध्यम से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं, वहीं शुक्ल पक्ष का आगमन वातावरण में एक अलग ही उत्साह भर देता है।
श्रावण का यह चरण धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारिवारिक रिश्तों को भी मजबूती देने वाला माना जाता है। मंदिरों में पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहेगा तो घर-आंगन में त्योहारों की तैयारियां शुरू हो जाएंगी।
सावन की हरियाली, झूले, लोकगीत और शिवभक्ति के बीच अब बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम और विश्वास की डोर बांधने का इंतजार रहेगा।
रक्षाबंधन में सजेगा भाई-बहन के प्रेम का संसार
श्रावण शुक्ल पक्ष की सबसे महत्वपूर्ण पर्व परंपराओं में रक्षाबंधन का विशेष स्थान है। यह केवल कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच जीवनभर बने रहने वाले स्नेह, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का उत्सव है।
बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है। भाई भी अपनी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है। समय बदल गया, परिवारों की संरचना बदल गई और जीवन की गति तेज हो गई, लेकिन रक्षाबंधन का भाव आज भी वही है दूरी कितनी भी हो, रिश्तों में प्रेम की डोर कभी कमजोर नहीं पड़ती।
कई बहनें दूर शहरों और विदेशों से अपने मायके लौटती हैं। कहीं भाई अपनी बहन के घर पहुंचता है तो कहीं डाक और ऑनलाइन माध्यमों से राखियां पहुंचती हैं। बदलते समय के साथ त्योहार मनाने का तरीका भले बदल गया हो, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की भावनाएं आज भी उतनी ही गहरी हैं।
सावन में शिवभक्ति का चरम
सावन को भगवान शिव का प्रिय मास माना जाता है। इस पूरे महीने शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भक्त भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
कांवड़ यात्रा भी सावन की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूर-दूर से कांवड़िये पवित्र नदियों का जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं। उनके मुख से निकलता ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ का जयघोष पूरे वातावरण को शिवमय कर देता है।
मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
सावन की विदाई में भी छिपा है भावनाओं का संसार
अब जब सावन अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, तो भक्तों के मन में एक ओर शिवभक्ति का उत्साह है, वहीं दूसरी ओर इस पावन महीने के विदा होने की भावुकता भी है।
सावन हमें यह संदेश देता है कि जीवन में सुख हो या दुख, मनुष्य को अपनी आस्था और विश्वास का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। जैसे बारिश की बूंदें सूखी धरती को नया जीवन देती हैं, वैसे ही भक्ति मनुष्य के भीतर उम्मीद और सकारात्मकता का संचार करती है।
सावन का आधा सफर पूरा हो चुका है, लेकिन इसकी भक्ति अभी बाकी है। अब शुक्ल पक्ष में रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक पर्व रिश्तों में मिठास घोलेंगे और सावन की शिवभक्ति अंतिम पड़ाव तक भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा देती रहेगी।
रिश्तों और आस्था का अनूठा संगम
सावन की सबसे खूबसूरत बात यही है कि यह केवल भगवान शिव की आराधना तक सीमित नहीं रहता। यह प्रकृति से प्रेम करना सिखाता है, परिवार के साथ जुड़ना सिखाता है और रिश्तों की अहमियत का एहसास कराता है।
एक ओर मंदिरों में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देती है, तो दूसरी ओर घरों में राखी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। एक तरफ भक्त भोलेनाथ के चरणों में जल अर्पित करते हैं, तो दूसरी तरफ बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने की तैयारी करती हैं।
यही सावन की खूबसूरती है जहां शिवभक्ति और भाई-बहन का प्रेम एक ही भाव में दिखाई देता है विश्वास, समर्पण और रिश्तों की मजबूती।
सावन भले ही धीरे-धीरे विदाई की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन इसकी यादें लंबे समय तक मन में बनी रहेंगी। शिवालयों में गूंजता हर-हर महादेव, कांवड़ियों का उत्साह, बारिश की रिमझिम फुहारें, झूलों की मस्ती और भाई-बहन के प्रेम से सजा रक्षाबंधन ये सभी सावन को जीवन का ऐसा अध्याय बना देते हैं, जिसमें आस्था भी है, भक्ति भी है और रिश्तों की गर्माहट भी।
