खबर मॉर्निंग, धर्म डेस्क
आसमान में जब दिन के उजाले के बीच अचानक सूर्य की चमक फीकी पड़ने लगे और कुछ पल के लिए धरती पर अंधेरे की चादर उतर आए, तो यह नजारा हमेशा से इंसान की जिज्ञासा और रोमांच का केंद्र रहा है। प्रकृति के इसी अद्भुत खगोलीय खेल का साक्षी बनने का मौका आज दुनिया के कई हिस्सों को मिलने जा रहा है। बुधवार, 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लग रहा है। खास बात यह है कि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। हालांकि भारत में रहने वाले लोग इस दुर्लभ खगोलीय घटना को अपनी आंखों से नहीं देख सकेंगे।
चंद्रमा पूरी तरह ढक लेगा सूर्य को
सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचने में आंशिक या पूरी तरह बाधित हो जाता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य की चमकीली डिस्क को पूरी तरह ढक लेता है और कुछ समय के लिए सूर्य के चारों ओर उसकी बाहरी वायुमंडलीय परत यानी कोरोना दिखाई दे सकती है।
नासा के अनुसार 12 अगस्त का ग्रहण टोटल सोलर इक्लिप्स है और इसकी पूर्णता का अधिकतम चरण लगभग 2 मिनट 18 सेकंड तक रह सकता है।
कहां दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?
इस ग्रहण का पूर्ण चरण पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध के एक सीमित क्षेत्र से दिखाई देगा। नासा के अनुसार पूर्णता का मार्ग उत्तरी साइबेरिया से शुरू होकर आर्कटिक क्षेत्र और उत्तरी अटलांटिक से गुजरते हुए आइसलैंड और स्पेन तक पहुंचेगा। इस मार्ग में आने वाले क्षेत्रों में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढकता हुआ दिखाई देगा।
वहीं यूरोप के बड़े हिस्से, उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में ग्रहण का आंशिक प्रभाव देखा जा सकता है।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण?
भारत के लिए इस बार सूर्य ग्रहण का नजारा देखने का अवसर नहीं होगा। ग्रहण की छाया का मार्ग भारत से दूर रहने के कारण देश के किसी भी हिस्से में सूर्य का यह पूर्ण ग्रहण दिखाई नहीं देगा। भारतीय खगोल प्रेमियों को इस अद्भुत घटना को देखने के लिए दूसरे देशों से आने वाली लाइव कवरेज या वैज्ञानिक संस्थाओं के प्रसारण का सहारा लेना होगा।
2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब लगा था?
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा था। वह वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) था, जबकि आज 12 अगस्त को होने वाला दूसरा ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) है। नासा के ग्रहण कैटलॉग में दोनों घटनाओं को क्रमशः वलयाकार और पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में दर्ज किया गया है।
धार्मिक दृष्टि से क्या होगा असर?
हिंदू पंचांग के अनुसार आज श्रावण कृष्ण अमावस्या भी है। सूर्य ग्रहण को भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष घटना माना जाता है और ग्रहण के समय सूतक आदि की मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि, धार्मिक परंपराओं में सामान्यतः ग्रहण की दृश्यता को सूतक और धार्मिक आचार-विचार से जोड़ा जाता है। चूंकि आज का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसके सूतक काल को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं। इस संबंध में श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग और परंपरा के अनुसार निर्णय लेना उचित होगा।
वैज्ञानिकों के लिए भी खास मौका
पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल धार्मिक या रोमांचक घटना ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन का भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। जब चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह ढक देता है, तब सूर्य की बाहरी परत कोरोना का अध्ययन अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से किया जा सकता है। इसी कारण दुनिया भर के वैज्ञानिक और खगोल प्रेमी ऐसे अवसरों का लंबे समय से इंतजार करते हैं।
नासा ने 12 अगस्त 2026 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के लिए ग्रहण-पथ और उसकी गति को दर्शाने वाले विस्तृत मानचित्र और एनिमेशन भी जारी किए हैं।
सूर्य ग्रहण को सीधे आंखों से देखने की कोशिश न करें
जहां ग्रहण दिखाई देगा, वहां इसे देखने के दौरान आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। सामान्य धूप के चश्मे से सूर्य ग्रहण देखना सुरक्षित नहीं माना जाता। सूर्य को देखने के लिए प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लासेज या सुरक्षित सौर फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए।
भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां लोगों को इसे देखने के लिए किसी भी तरह सूर्य की ओर सीधे देखने की कोशिश करने की आवश्यकता नहीं है।
खगोलीय घटना, जिसे देखने के लिए दुनिया की निगाहें आसमान पर
आज का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि साल का दूसरा सूर्य ग्रहण ही नहीं, बल्कि 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण भी है। एक ओर वैज्ञानिक इस घटना को चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य की सटीक खगोलीय स्थिति के रूप में देख रहे हैं, तो दूसरी ओर करोड़ों लोगों के लिए सूर्य ग्रहण सदियों पुरानी जिज्ञासा, आस्था और रहस्य से जुड़ी घटना है।
भारत में भले ही आज आसमान में सूर्य ग्रहण का अद्भुत दृश्य दिखाई न दे, लेकिन दुनिया के जिन हिस्सों में चंद्रमा की छाया सूर्य को पूरी तरह ढक देगी, वहां दिन के उजाले में कुछ क्षणों के लिए उतरने वाला अंधेरा निश्चित रूप से प्रकृति के उस अद्भुत संतुलन की याद दिलाएगा, जिसके सामने मानव सभ्यता आज भी विस्मय से भर उठती है।
