भारतीय सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि और समय का विवरण नहीं, बल्कि दैनिक जीवन को शुभ-अशुभ प्रभावों के अनुरूप व्यवस्थित करने का आधार माना जाता है। शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का विशेष महत्व है। आज मघा नक्षत्र, व्यतीपात योग तथा सिंह राशि में चंद्रमा का संचार कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल संयोग बना रहा है। धार्मिक अनुष्ठान, मांगलिक कार्य, यात्रा तथा नए कार्यों की शुरुआत से पूर्व आज के शुभ-अशुभ मुहूर्तों की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।
पंचांग विवरण
- तिथि : आषाढ़ शुक्ल तृतीया प्रातः 06:27 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ।
- नक्षत्र : मघा नक्षत्र सायं 06:34 बजे तक, तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र।
- योग : व्यतीपात योग रात्रि 10:46 बजे तक, इसके बाद वरीयान योग।
- करण : गरज करण प्रातः 06:27 बजे तक, इसके बाद वणिज करण।
- चंद्रमा : दिन-रात सिंह राशि में संचार करेगा।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
- सूर्योदय : प्रातः 05:34 बजे
- सूर्यास्त : सायं 07:20 बजे
- चंद्रोदय : प्रातः 08:37 बजे
- चंद्रास्त : रात्रि 09:33 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 03:55 बजे से 04:41 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक।
अमृत काल : सायं 04:18 बजे से 05:49 बजे तक।
चौघड़िया मुहूर्त
- चर (सामान्य) : प्रातः 05:34 बजे से 07:17 बजे तक
- लाभ (उन्नति) : प्रातः 07:17 बजे से 09:01 बजे तक
- अमृत (सर्वोत्तम) : प्रातः 09:01 बजे से 10:44 बजे तक
- शुभ (उत्तम) : दोपहर 12:27 बजे से 02:11 बजे तक
आज के अशुभ मुहूर्त
राहुकाल : प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
गुलिकाल : प्रातः 07:30 बजे से 09:00 बजे तक।
यमगण्ड: दोपहर 03:30 बजे से सायं 05:00 बजे तक।
दिशाशूल : पश्चिम दिशा में।
शिववास : आज शिववास प्रातः 06:27 बजे तक सभा में रहेगा। इसके बाद 18 जुलाई प्रातः 04:42 बजे तक क्रीड़ा में रहेगा, तत्पश्चात भगवान शिव का वास कैलाश पर माना जाएगा।
विशेष ज्योतिषीय संकेत : सिंह राशि में चंद्रमा का गोचर आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति को बढ़ाने वाला माना जाता है। मघा और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का संयोग सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक कार्यों तथा रचनात्मक गतिविधियों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। हालांकि राहुकाल और यमगण्ड के दौरान महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचना उचित रहेगा।
