आज का पंचांग, 24 जुलाई 2026: दशमी तिथि सुबह 9:13 बजे तक, रात से भद्रा का प्रभाव; सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग में करें शुभ कार्य

शुक्रवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि प्रातः 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ होगा। देवशयनी एकादशी का व्रत उदया तिथि के अनुसार 25 जुलाई 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा तथा व्रत का पारण 26 जुलाई 2026 (रविवार) को किया जाएगा। आज दिनभर ब्रह्म एवं शुक्ल योग का शुभ संयोग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग जैसे अत्यंत मंगलकारी योग बन रहे हैं, जबकि रात्रि में भद्रा और गंडमूल का प्रभाव प्रारंभ होगा। ऐसे में शुभ कार्यों के लिए दिन का समय अधिक अनुकूल माना गया है।

आज का पंचांग (24 जुलाई 2026)

तिथि: आषाढ़ शुक्ल पक्ष दशमी – प्रातः 9:13 बजे तक, इसके बाद एकादशी

नक्षत्र: अनुराधा – रात्रि 4:37 बजे तक, इसके बाद ज्येष्ठा

योग: ब्रह्म योग एवं शुक्ल योग

करण: वणिज, इसके बाद रात्रि 10:24 बजे से भद्रा (गर करण)

गंडमूल: रात्रि 4:37 बजे से प्रारंभ

देवशयनी एकादशी

व्रत तिथि: 25 जुलाई 2026 (शनिवार)

पारण: 26 जुलाई 2026 (रविवार)

सूर्य एवं चंद्रमा का समय

सूर्योदय: प्रातः 6:14 बजे

सूर्यास्त: सायं 7:17 बजे

चंद्रोदय: सायं 6:29 बजे

चंद्रास्त: 25 जुलाई को प्रातः 1:44 बजे

आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 5:05 बजे से 5:39 बजे तक

प्रातः संध्या: प्रातः 5:22 बजे से 6:14 बजे तक

सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः 6:14 बजे से 25 जुलाई को प्रातः 1:06 बजे तक

रवि योग: प्रातः 6:14 बजे से 25 जुलाई को प्रातः 1:06 बजे तक

अमृत काल: दोपहर 1:27 बजे से 3:14 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 1:26 बजे से 2:28 बजे तक

विजय मुहूर्त: सायं 4:31 बजे से 5:33 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: सायं 7:40 बजे से 7:57 बजे तक

आज के अशुभ मुहूर्त

राहुकाल: प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक

गुलिक काल: प्रातः 8:09 बजे से 10:05 बजे तक

यमगण्ड: सायं 5:48 बजे से 7:44 बजे तक

दुर्मुहूर्त: प्रातः 9:19 बजे से 10:21 बजे तक

भद्रा काल: रात्रि 10:24 बजे से 25 जुलाई को प्रातः 6:15 बजे तक

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग तथा ब्रह्म योग के संयोग से पूजा-पाठ, जप, दान, धार्मिक अनुष्ठान, नए कार्यों की शुरुआत और मांगलिक कार्यों के लिए दिन अत्यंत शुभ माना गया है। वहीं रात्रि 10:24 बजे से भद्रा का आरंभ होने के कारण इस अवधि में मांगलिक एवं शुभ कार्यों से परहेज करना उचित रहेगा। साथ ही रात्रि 4:37 बजे से गंडमूल नक्षत्र प्रारंभ होने के कारण संबंधित धार्मिक नियमों का पालन करना भी लाभकारी माना जाता है।

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