भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। आज वराह जयंती का पावन अवसर है। भगवान विष्णु के वराह अवतार की आराधना के लिए यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार आज द्वितीया तिथि सुबह 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। दिन में सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे धार्मिक एवं शुभ कार्यों के लिए दिन का महत्व बढ़ जाता है।
आज हस्त नक्षत्र दोपहर करीब 1 बजकर 6-7 मिनट तक रहेगा, इसके बाद चित्रा नक्षत्र शुरू होगा। दोपहर 1 बजकर 42-43 मिनट तक शुक्ल योग रहेगा और उसके बाद ब्रह्म योग का आरंभ होगा। अभिजीत मुहूर्त को भी दिन का विशेष शुभ समय माना गया है।
आज का पंचांग
तिथि: भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वितीया सुबह 7:08 बजे तक, इसके बाद तृतीया तिथि
वार: रविवार
नक्षत्र: हस्त दोपहर 1:06-1:07 बजे तक, इसके बाद चित्रा
योग: शुक्ल योग दोपहर 1:42-1:43 बजे तक, इसके बाद ब्रह्म योग
चंद्र राशि: कन्या
सूर्य राशि: सिंह
सूर्योदय: सुबह लगभग 6:04 से 6:09 बजे
सूर्यास्त: शाम लगभग 6:25 से 6:28 बजे
वराह जयंती विशेष : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान विष्णु के वराह अवतार की जयंती के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को पाताल में ले जाकर संकट उत्पन्न किया, तब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया। इसलिए आज भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा, विष्णु मंत्र का जाप, दान और सत्कर्म करने का विशेष महत्व माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:31/4:35 से 5:18/5:22 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 4:55 से 6:04 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 से दोपहर 12:41 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:20 से 3:09 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:25 से 6:49 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 6:28 से 7:37 बजे तक
अमृत काल: सुबह 7:04 से 8:41 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:53 से अगले दिन 12:40 बजे तक
राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: शाम लगभग 4:55 से 6:28 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 12:16 से 1:48 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 3:22 से 4:55 बजे तक
वर्ज्य: रात 9:22 से 11:02 बजे तक
विडाल योग: सुबह 6:04 बजे से दोपहर 1:06 बजे तक
पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ दिन
रविवार, वराह जयंती और शुभ योगों के संयोग के कारण आज भगवान विष्णु की आराधना, मंदिर दर्शन, मंत्र जाप, दान-पुण्य और सात्विक धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। भक्त भगवान विष्णु के वराह स्वरूप का ध्यान कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकते हैं। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई उपासना से मन को शांति तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
नोट: पंचांग में मुहूर्त और समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। पूजा, व्रत और शुभ कार्य के लिए स्थानीय सूर्योदय एवं पंचांग को प्राथमिकता दें।
-खबर मार्निंग
