भारतीय सनातन परंपरा में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण तथा ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का ज्ञान प्राप्त होता है, जिससे दैनिक कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों एवं शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त समय का निर्धारण किया जाता है। आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। दिन में अश्लेषा नक्षत्र के बाद मघा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। हर्षण योग और वज्र योग के संयोग से दिन विशेष फलदायी माना जा रहा है। आइए जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग।
पंचांग विवरण : तिथि : ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी तिथि सायं 4 बजकर 59 मिनट तक, तत्पश्चात षष्ठी तिथि का आरंभ।
नक्षत्र : अश्लेषा नक्षत्र प्रातः 10 बजकर 06 मिनट तक, इसके उपरांत मघा नक्षत्र।
योग : हर्षण योग दोपहर 2 बजकर 53 मिनट तक, इसके बाद वज्र योग।
करण : बव करण प्रातः 5 बजकर 53 मिनट तक, इसके बाद बालव करण सायं 4 बजकर 59 मिनट तक। तत्पश्चात तैतिल करण, जो 20 जून की प्रातः 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
चंद्रमा : प्रातः 10 बजकर 06 मिनट तक कर्क राशि में संचार करेंगे, इसके बाद सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।
सूर्योदय एवं चंद्रमा संबंधी जानकारी
- सूर्योदय : प्रातः 5 बजकर 46 मिनट
- सूर्यास्त : सायं 6 बजकर 42 मिनट
- चंद्रोदय : पूर्वाह्न 10 बजकर 00 मिनट
- चंद्रास्त : रात्रि 10 बजकर 41 मिनट
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 4 बजकर 17 मिनट से प्रातः 5 बजकर 01 मिनट तक
- अभिजित मुहूर्त : पूर्वाह्न 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त : सायं 6 बजकर 40 मिनट से सायं 7 बजकर 03 मिनट तक
अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल : प्रातः 10 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 14 मिनट तक
- यमगण्ड काल : दोपहर 3 बजकर 28 मिनट से सायं 5 बजकर 05 मिनट तक
- गुलिक काल : प्रातः 7 बजकर 23 मिनट से प्रातः 9 बजकर 00 मिनट तक।
दुर्मुहूर्त : - प्रातः 8 बजकर 21 मिनट से प्रातः 9 बजकर 13 मिनट तक और दोपहर 12 बजकर 40 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक।
दिशा शूल : आज पश्चिम दिशा में दिशा शूल रहेगा। आवश्यक होने पर यात्रा से पूर्व परंपरानुसार उचित उपाय कर यात्रा करना शुभ माना गया है।
आज का विशेष महत्व : पंचमी तिथि, मघा नक्षत्र तथा सिंह राशि में चंद्रमा का प्रवेश आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सम्मान प्राप्ति के लिए अनुकूल माना जाता है। धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ, मंत्र-जप तथा पारिवारिक मांगलिक कार्यों के लिए दिन सामान्य रूप से शुभ फलदायी रहेगा। हालांकि राहुकाल एवं दुर्मुहूर्त के समय महत्वपूर्ण कार्यों को प्रारंभ करने से बचना चाहिए।
(यह पंचांग वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। स्थानीय स्थान एवं समयानुसार इसमें आंशिक अंतर संभव है।)
