कसौटी पर पांच राज्यों के विस चुनाव परिणाम

 निशिकांत ठाकुर

मीडिया के इस सिद्धांत को पहले भी लिख चुका हूं और वैसे भी जो उससे जुड़े हैं, वह यह जानते हैं कि जब चुनाव और युद्ध हो, तो फिर सब का फोकस इन्हीं दोनों घटनाओं पर होता है। इसलिए इस बार भी चुनाव का ही विश्लेषण करते हैं। पिछले दिनों चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में सरकार गठन के साथ—साथ मंत्रिमंडल गठन कार्य भी लगभग पूरा हो गया। इन राज्यों में असम में पुनः भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल करके हेमंत विश्व सरमा के नेतृत्व में सरकार का गठन कर लिया है। प. बंगाल में भी टीएमसी के पंद्रह वर्षों के शासन को उखाड़ फेंकते हुए भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार का गठन कर लिया। तमिलनाडु में वर्षों से चली आ रही सरकार को बाहर करते हुए दो वर्ष पहले बनाई गई टीवीके ने जोसफ विजय थालपति के नेतृत्व में सरकार का गठन कर लिया है। केरलम में कांग्रेस ने अपनी सरकार बना ली है। वहीं, पुडुचेरी में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बन गई है। इन राज्यों ने इस चुनाव ने दिखा दिया कि सचमुच जनहित के लिए जो सरकार काम करती है, उसी की अगली सरकार बनती है। देश की जनता अब शिक्षित है और उसे अपना हितलाभ देखना—समझना आता जा रहा है। राजनीतिज्ञों को इस पर गहन चिंतन करने की जरूरत है कि समाज किस बात को सराह रहा है और किन मुद्दों पर उसे आसानी से बरगलाया जा सकता है या जा रहा है। राजनीतिज्ञों को अब यह भी सोचना ही होगा, जिस काम को करने के लिए निकला हूं, यानी एक स्वतंत्र, न्यायप्रिय, समानधर्मा राज्य की स्थापना, जो इस युग में आगे भी एक उदाहरण बने। इस उद्देश्य को मूल जातिभेद की रूढ़ियों से टकराते हुए कहीं खास गृहयुद्ध न छिड़ जाए, विरोधियों के साथ जनता की नजर में हम तमाशा न बन जाएं, यही प्रयास करना है।

सबसे पहले प. बंगाल को देखते हैं जहां पहले विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के माध्यम से 90 लाख से अधिक मतदाताओं से मतदान करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया था। इस कदम की भारत में लोकतंत्र के क्षरण के रूप में आलोचना की गई है। इस चुनाव में सत्ताधारी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा, जो 2011 से सत्ता में थी। भारतीय जनता पार्टी चुनाव शुरू होने के बाद से राज्य में निर्वाचित होने वाली पहली दक्षिणपंथी पार्टी बन गई। 92.93% मतदान (एक अनहोनी जैसी घटना) के साथ, यह चुनाव पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे व्यापक भागीदारी वाला चुनाव रहा, जिसने 2011 के चुनाव को भी पीछे छोड़ दिया। भारतीय राजनीति में अभूतपूर्व घटनाक्रम में तृणमूल कांग्रेस की मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव में अपनी सीट और विधानसभा में बहुमत खोने के बावजूद, चुनाव संचालन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए, अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। बाद में उन्होंने 7 मई, 2026 को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने पर राज्यपाल द्वारा भंग किए जाने पर पद छोड़ा। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री के शपथ समारोह के दौरान बंगाल की जनता को नमन किया और दंडवत होकर आभार जताया।

असम विधानसभा के 126 सदस्यों को चुनने के लिए 9 अप्रैल, 2026 को असम में विधानसभा चुनाव हुआ। वोटों की गिनती हुई और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 4 मई 2026 को परिणाम घोषित किए गए। वैसे, असम के मुख्यमंत्री की छवि समाज में हिंदू—मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव पैदा करने वाले और विपक्षी नेताओं में खासकर कांग्रेस के प्रति समाज में असंतोष फैलाने वालों में लिया जाता है, लेकिन इस विधानसभा चुनाव ने मुख्यमंत्री हेमंत विश्व सरमा ने अपने ऊपर लगाए गए सारे आरोपों को दरकिनार करते हुए जनता में अलोकप्रिय छवि होने के बावजूद फिर से दो तिहाई बहुमत लेकर साबित कर दिया कि इनके ऊपर सारे आरोप राजनीतिज्ञों द्वारा लक्ष्य को साधने के लिए लगाए गए थे, जिसने उन्हें दो तिहाई बहुमत देकर फिर से मुख्यमंत्री बना दिया।

तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय थलपति ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। इसके साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में दो प्रमुख द्रविड़ दलों का वर्चस्व समाप्त हो गया है। विजय के साथ—साथ नौ अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है। जब विजय के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने पदभार संभाला, तो उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपना पहला आदेश शपथ लेने वाली जगह, यानी मंच से ही जारी किया। उन्होंने पहला हस्ताक्षर तमिलनाडु के सभी घरों को 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के आदेश वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद, विजय ने मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए हर जिले में एक स्पेशल फ़ोर्स और महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक विशेष कार्य बल 'लायनेस' की स्थापना के आदेश भी जारी किए। दो वर्ष पहले गठित पार्टी की बहुत बड़ी उपलब्धि के रूप में देशभर में इसे देखा जा रहा है। आगे कल क्या होगा, यह तो समय और मुख्यमंत्री की कार्यनीति ही तय करेगा, लेकिन यदि तमिलनाडु के किसी साधारण से व्यक्ति की बात करें, तो वह जोसफ विजय थलपति के मुख्यमंत्री बनने पर उनसे काफी उम्मीद रखते हैं।

केरलम के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे पिनराई विजयन से एक संवाददाता ने पूछा कि आपके राज्य में भारतीय जनता पार्टी को मात्र तीन सीटें ही मिली हैं, तो उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसते हुए उत्तर दिया, 'हां, मुझे पता है, उस क्षेत्र में शिक्षा का अभाव है।' सच या झूठ, आजादी के बाद से अब तक का इतिहास यही बताया गया है कि सर्वाधिक शिक्षित इस राज्य में भारतीय जनता पार्टी अनाथ है। एसे में वहां सत्ता पाने के लिए वह प्रयत्नशील जरूर है। यदि कभी वह भी पश्चिम बंगाल बन जाए, तो यह अलग बात होगी, लेकिन अभी तक दक्षिण भारत में भाजपा का झंडा बुलंद नहीं हो सका है। 

अब लगे हाथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की भी स्थिति को समझते हैं। 2026 के पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में एन. रंगासामी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 30 में से 18 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी। एआईएनआरसी ने 12 और बीजेपी ने 4 सीटें जीतीं। डीएमके को 5 और कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली। एन. रंगासामी पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने।

2026 के जिन राज्यों में चुनाव हुआ है, उनकी स्थिति उपरोक्त जानकारी से मिल जाती है, लेकिन लोकतांत्रिक नजरिये से यदि देखें तो युवाओं ने जो करिश्मा किया है, वह देश के युवाओं के लिए प्रशंसनीय है। लेकिन, एक बार फिर यह प्रश्न उठता है कि जनता ने जिस विश्वास से राज्य की सत्ता सौंपी है, उनकी यह इच्छा क्या पूरी हो सकेगी। कहा जाता है कि गंगाजल शीशे के पात्र में वर्षों रखा रह सकता है, उसका कुछ नहीं बिगड़ता, बस पात्र के नीचे यह के थोड़ा नीचे मिट्टी स्थिर बैठ जाती है। इसी वजह से पवित्र अवसरों पर हिंदू घरों में गंगाजल की तलाश होती है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)

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