सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि और नक्षत्र का विवरण नहीं, बल्कि जीवन को शुभता और संतुलन के साथ जीने का मार्गदर्शक माना जाता है। प्रत्येक दिन का ग्रह-नक्षत्र, योग और मुहूर्त हमारे दैनिक कार्यों, पूजा-पाठ और शुभ आयोजनों पर विशेष प्रभाव डालता है। सोमवार, 11 मई 2026 को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। आज का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।
आज का पंचांग : 11 मई 2026, सोमवार
तिथि : कृष्ण पक्ष नवमी तिथि दोपहर 03 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। वहीं उसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी जो 12 मई दोपहर 02:52 बजे तक रहेगा।
नक्षत्र : शतभिषा — 11 मई रात्रि 12:50 बजे तक
पूर्वभाद्रपदा — 12 मई रात्रि 01:28 बजे से प्रारंभ
योग: इन्द्र योग — 11 मई रात्रि 02:08 बजे से 12 मई रात्रि 01:04 बजे तक। वैधृति योग — 12 मई रात्रि 01:04 बजे से 11:19 बजे तक।
करण : गर — प्रातः 03:22 बजे से दोपहर 03:25 बजे तक।
वणिज — दोपहर 03:25 बजे से 12 मई प्रातः 03:15 बजे तक। विष्टि — 12 मई प्रातः 03:15 बजे से दोपहर 02:52 बजे तक।
सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय — प्रातः 05:37 बजे
सूर्यास्त — सायं 06:57 बजे
चन्द्रोदय — प्रातः 01:46 बजे
चन्द्रास्त — दोपहर 01:22 बजे
आज का शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त — सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक।
प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:30 बजे से 05:33 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:33 बजे से 03:27 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:01 बजे से 07:22 बजे तक
सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:02 बजे से 08:05 बजे तक
अमृत काल: शाम 06:05 बजे से 07:43 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:56 बजे से 12:38 बजे
ब्रह्म मुहूर्त — प्रातः 04:00 बजे से 04:48 बजे तक।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल — प्रातः 07:17 बजे से 08:57 बजे तक।
यम गण्ड — सुबह 10:37 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक।
गुलिक काल — दोपहर 01:57 बजे से 03:37 बजे तक।
दुर्मुहूर्त — दोपहर 12:44 बजे से 01:37 बजे तक एवं 03:24 बजे से 04:17 बजे तक।
विशेष जानकारी
दिनमान — 13 घंटे 29 मिनट 22 सेकंड
रात्रिमान — 10 घंटे 29 मिनट 58 सेकंड
मध्याह्न — दोपहर 12:18 बजे
दिशा शूल — पूर्व दिशा
शिववास — दोपहर 03:24 बजे तक सभा में, इसके बाद क्रीड़ा में माना जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज भगवान शिव की पूजा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा दान-पुण्य करना विशेष शुभ फल प्रदान करेगा। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल उत्तम माने गए हैं, जबकि राहुकाल और दुर्मुहूर्त में महत्वपूर्ण कार्यों से बचना चाहिए।
