ज्येष्ठ अधिकमास की पावन पूर्णिमा तिथि आज शनिवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी तथा चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा पर स्नान, दान, जप-तप और सत्संग का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। आज शिव योग और रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जिससे दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
आज का पंचांग (शनिवार, ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा)
तिथि – चतुर्दशी प्रातः 9 बजकर 50 मिनट तक, इसके उपरांत पूर्णिमा तिथि का आरंभ प्रातः 11 बजकर 58 मिनट से।
वार – शनिवार
नक्षत्र – विशाखा
योग – शिव योग, रवि योग
सूर्योदय – प्रातः 5 बजकर 54 मिनट
सूर्यास्त – सायं 7 बजकर 13 मिनट
चंद्रोदय – सायं 6 बजकर 40 मिनट
चंद्रास्त – प्रातः 4 बजकर 50 मिनट
चौघड़िया मुहूर्त
प्रातः का चौघड़िया – प्रातः 7 बजकर 08 मिनट से प्रातः 8 बजकर 51 मिनट तक
सायं का चौघड़िया – सायं 7 बजकर 13 मिनट से रात्रि 8 बजकर 21 मिनट तक
शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त – पूर्वाह्न 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 4 बजकर 15 मिनट से प्रातः 4 बजकर 59 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – सायं 6 बजकर 35 मिनट से सायं 6 बजकर 57 मिनट तक
अशुभ समय
राहुकाल – प्रातः 8 बजकर 51 मिनट से प्रातः 10 बजकर 35 मिनट तक
यमगण्ड काल – दोपहर 2 बजकर 02 मिनट से अपराह्न 3 बजकर 46 मिनट तक
गुलिक काल – प्रातः 5 बजकर 24 मिनट से प्रातः 7 बजकर 08 मिनट तक
भद्रा काल – प्रातः 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 1 बजकर 05 मिनट तक
दिशा शूल: पूर्व दिशा में
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिश्रित जल से स्नान, भगवान विष्णु का पूजन, तुलसी अर्चना तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं धन का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। श्रद्धालु आज चंद्रमा को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना भी कर सकते हैं।
