आज का पंचांग: 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार)

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से आज का दिन विशेष महत्व रखता है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के साथ दिन की शुरुआत हो रही है, जो रात्रि में पूर्णिमा में परिवर्तित होगी। आज रवि योग का संयोग पूरे दिन बना हुआ है, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। आइए, जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग—

 तिथि एवं नक्षत्र

  • तिथि: शुक्ल पक्ष चतुर्दशी – रात्रि 09:12 बजे तक, उसके बाद पूर्णिमा
  • नक्षत्र: चित्रा – प्रातः 02:16 बजे, 01 मई तक, उसके बाद स्वाति
  • करण:
    • गर – प्रातः 08:29 बजे तक
    • वणिज – रात्रि 09:12 बजे तक
    • इसके बाद विष्टि
  • योग: वज्र – रात्रि 08:55 बजे तक, फिर सिद्धि
  • पक्ष: शुक्ल
  • दिन: गुरुवार

 चंद्रमा की स्थिति

  • चंद्र राशि: कन्या – दोपहर 01:14 बजे तक, इसके बाद तुला

सूर्योदय एवं चंद्रमा का समय

  • सूर्योदय: प्रातः 05:41 बजे
  • सूर्यास्त: सायं 06:56 बजे
  • चंद्रोदय: सायं 05:56 बजे
  • चंद्रास्त: प्रातः 04:59 बजे, 01 मई

शुभ मुहूर्त एवं योग

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:15 बजे से 04:58 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:52 बजे से 12:45 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: 02:31 बजे से 03:24 बजे तक
  • अमृत काल: सायं 07:20 बजे से 09:04 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:57 बजे से 12:40 बजे (01 मई)
  • रवि योग: पूरे दिन

आज के अशुभ समय

  • यमगण्ड: 05:41 बजे से 07:21 बजे
  • गुलिक काल: 09:00 बजे से 10:39 बजे
  • दुर्मुहूर्त: 10:06 बजे से 10:59 बजे, 03:24 बजे से 04:17 बजे
  • राहुकाल: 01:58 बजे से 03:37 बजे
  • भद्रा: रात्रि 09:12 बजे से प्रातः 05:41 बजे (01 मई)
  • भद्रा वास: पाताल लोक
  • दिशाशूल: दक्षिण दिशा

दिन का शुभ चौघड़िया

  • शुभ-उत्तम: 05:41 बजे से 07:21 बजे
  • चर-सामान्य: 10:39 बजे से 12:19 बजे
  • लाभ-उन्नति: 12:19 बजे से 01:58 बजे
  • अमृत-सर्वोत्तम: 01:58 बजे से 03:37 बजे
  • शुभ-उत्तम: 05:16 बजे से 06:56 बजे

 रात्रि का शुभ चौघड़िया

  • अमृत-सर्वोत्तम: 06:56 बजे से 08:16 बजे
  • चर-सामान्य: 08:16 बजे से 09:37 बजे
  • लाभ-उन्नति: 12:18 बजे से 01:39 बजे (01 मई)
  • शुभ-उत्तम: 02:59 बजे से 04:20 बजे (01 मई)
  • अमृत-सर्वोत्तम: 04:20 बजे से 05:41 बजे (01 मई)

 शिववास

  • भोजन में – रात्रि 09:12 बजे तक
  • इसके बाद – श्मशान में

आज चतुर्दशी से पूर्णिमा की ओर बढ़ता दिन धार्मिक साधना, दान-पुण्य और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। रवि योग का प्रभाव पूरे दिन रहने से नए कार्यों की शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी यह दिन अनुकूल है। हालांकि राहुकाल और भद्रा के समय में शुभ कार्यों से परहेज करना उचित रहेगा।


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