सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि और नक्षत्रों का विवरण भर नहीं है, बल्कि यह जीवन के दैनिक कार्यों को शुभ-अशुभ समय के अनुसार व्यवस्थित करने का मार्गदर्शक भी माना जाता है। 09 जून 2026, मंगलवार का दिन ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि के साथ आरंभ हो रहा है। आज पूर्व भाद्रपद एवं उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। साथ ही प्रीति योग, आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग तथा पूरे दिन पंचक का विशेष संयोग बन रहा है। चंद्रमा आज मीन राशि में संचरण कर रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंचांग विवरण : तिथि : नवमी तिथि – प्रातः 02:34 बजे, 10 जून तक, तत्पश्चात दशमी तिथि
पक्ष : कृष्ण पक्ष
वार : मंगलवार
नक्षत्र : पूर्व भाद्रपद – प्रातः 09:39 बजे तक, इसके बाद उत्तर भाद्रपद
करण : तैतिल – अपराह्न 03:05 बजे तक, इसके बाद गर करण – प्रातः 02:34 बजे, 10 जून तक
योग : प्रीति – प्रातः 08:18 बजे तक, इसके बाद आयुष्मान योग
चंद्र राशि : मीन
सूर्योदय : प्रातः 05:24 बजे
सूर्यास्त : सायं 07:19 बजे
चंद्रोदय : प्रातः 01:21 बजे, 10 जून
चन्द्रास्त : अपराह्न 01:05 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:03 बजे से 04:44 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : पूर्वाह्न 11:53 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
विजय मुहूर्त : अपराह्न 02:40 बजे से 03:36 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त : सायं 07:17 बजे से 07:37 बजे तक
अमृत काल : प्रातः 04:37 बजे से 06:12 बजे तक, 10 जून
निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:01 बजे से 12:41 बजे तक, 10 जून
सर्वार्थ सिद्धि योग : प्रातः 09:39 बजे से प्रातः 05:24 बजे, 10 जून तक
आज के अशुभ मुहूर्त
राहुकाल : अपराह्न 03:50 बजे से 05:34 बजे तक
यमगण्ड : प्रातः 08:53 बजे से 10:37 बजे तक
गुलिक काल : दोपहर 12:21 बजे से 02:06 बजे तक
दुर्मुहूर्त : प्रातः 08:11 बजे से 09:06 बजे तक
विशेष ज्योतिषीय संकेत
पंचक काल : पूरे दिन
दिशाशूल : उत्तर दिशा
शिववास : सभा में – प्रातः 02:34 बजे, 10 जून तक, तत्पश्चात क्रीड़ा में
आज का महत्व : आज नवमी तिथि, सर्वार्थ सिद्धि योग तथा आयुष्मान योग का संयोग धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। हालांकि पूरे दिन पंचक रहने के कारण कुछ विशेष कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पूजा-पाठ, जप, ध्यान, दान-पुण्य तथा ईश्वर आराधना के लिए दिन विशेष फलदायी माना गया है। उत्तर दिशा में दिशाशूल होने से उस दिशा की यात्रा आवश्यक होने पर शुभ उपाय करके ही प्रस्थान करना उचित रहेगा।
