विनोद कुमार झा
सनातन धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, किंतु जब अमावस्या सोमवार के दिन आती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। विशेष रूप से फाल्गुन मास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी मानी जाती है। यह दिन भगवान शिव की आराधना, पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ अवसर प्रदान करता है।
सोमवती अमावस्या क्या है?
जब अमावस्या तिथि सोमवार को पड़ती है, तब वह सोमवती अमावस्या कहलाती है। ‘सोम’ का अर्थ है चंद्रमा और सोमवार का संबंध चंद्रदेव तथा भगवान शिव से माना गया है। अमावस्या तिथि चंद्रमा के लुप्त होने का प्रतीक है, जो आत्मचिंतन, तप और साधना का संदेश देती है। अतः सोमवार और अमावस्या का संयोग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
फाल्गुन मास का विशेष महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास को वर्ष का अंतिम मास माना जाता है। यह मास भक्ति, साधना और उत्सवों का संगम है। इसी मास में जैसे पावन पर्व भी आते हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। फाल्गुन मास की सोमवती अमावस्या भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर मानी जाती है।
सनातन धर्म में व्रत की मान्यता
सनातन धर्म में व्रत का अर्थ केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और साधना से है। सोमवती अमावस्या के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। पवित्र नदियों में स्नान, विशेषकर गंगा स्नान, अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया जप, तप, दान और पितरों का तर्पण अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। सुहागिन स्त्रियाँ अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं और पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा कर परिवार की समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व
सोमवती अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और समाज कल्याण का संदेश भी देती है। इस दिन दान-पुण्य, अन्नदान, वस्त्रदान और गौसेवा का विशेष महत्व बताया गया है। इससे समाज में सहयोग, करुणा और सेवा की भावना प्रबल होती है।
अमावस्या अंधकार का प्रतीक है, किंतु इसी अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश भी देती है। व्रत और साधना के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर के नकारात्मक विचारों का त्याग कर सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करता है।
फाल्गुन मास की सोमवती अमावस्या सनातन धर्म में आस्था, तप और भक्ति का पावन संगम है। यह दिन भगवान शिव की कृपा, पितरों के आशीर्वाद और आत्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है। इस प्रकार, फाल्गुन मास की सोमवती अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और आत्मकल्याण का दिव्य पर्व है।

