अतिक्रमण अभियान पर राजनीतिक विवाद तेज: पूर्व पार्षद ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल, मेयर ने मांगी रिपोर्ट

बरेली। विशेष संवाददाता । नगर निगम बरेली द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व पार्षद अमित गिहार ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे “एकतरफा और भेदभावपूर्ण” बताया है। उन्होंने इस मामले में पार्टी के ही मेयर उमेश गौतम से मुलाकात कर व्यापारियों की नाराजगी और जमीनी स्थिति से अवगत कराया।

अमित गिहार का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई यदि आवश्यक है तो वह पूरी तरह निष्पक्ष और समान रूप से होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दुकानदारों और ठेले-खोमचे वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, जबकि कई प्रभावशाली क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यदि लाइसेंस की जांच हो रही है तो सभी की होनी चाहिए। यदि ध्वस्तीकरण हो रहा है तो वह समान रूप से लागू किया जाए। चयनात्मक कार्रवाई जनता के विश्वास को कमजोर करती है।”

सूत्रों के अनुसार, मेयर उमेश गौतम ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और कार्रवाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।

वहीं नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह नियमों के तहत चलाया जा रहा है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा। अधिकारियों के मुताबिक यह अभियान किशोर बाजार से लेकर चॉकलेट चौराहे तक चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा और निर्धारित क्षेत्र में जहां भी अवैध अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां कार्रवाई की जाएगी। निगम का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य शहर को व्यवस्थित, सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त बनाना है।

इस घटनाक्रम के बाद शहर के राजनीतिक और व्यापारिक हलकों में बहस तेज हो गई है। व्यापारी संगठनों ने भी प्रशासन से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस विवाद को किस तरह सुलझाते हैं और अभियान किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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