आबिद हुसैन, हापुड़। बडौदा सिहानी, जनपद हापुड़ के निवासी और समाजसेवी आरफीन अहमद राणा ने माननीय राष्ट्रपति भारत सरकार को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने रमजान उल मुबारक के पवित्र महीने के दौरान शराब की दुकानों को बंद करने की मांग की है, ताकि मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो सके।
आरफीन अहमद ने पत्र में बताया कि विश्व के समस्त मुस्लिम समाज के लिए रमजान श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। इस महीने 29 या 30 रोजे रखने के बाद ही ईद उल फितर का त्योहार मनाया जाता है। सभी मुसलमान एक साथ रोजा रखते हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि पूरे पवित्र माह में शराब की दुकानें नियमित रूप से खुली रहती हैं। इससे शराबी गलियों, मोहल्लों और सड़कों पर, खासकर मस्जिदों व मदरसों के आसपास बदतमीजी करते हैं, हुड़दंग मचाते हैं। इससे रोजेदारों को भारी परेशानी होती है और समस्त मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत होती हैं।उन्होंने आगे कहा, "रोजे की स्थिति में अगर रोजेदार के मुंह में बीड़ी का धुआं भी चला जाए, तो रोजा टूट जाता है। शराब की बदबू तो मुसलमानों के लिए और भी खतरनाक है, क्योंकि इस्लाम में शराब पूर्ण रूप से निषिद्ध है।" आरफीन ने उदाहरण देते हुए बताया कि हिंदू भाइयों के त्योहारों पर मांस की दुकानें और होटल बंद कराए जाते हैं, उसी प्रकार रमजान में शराब की दुकानों को बंद करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत होने से बचेंगी।समाजसेवी ने राष्ट्रपति से इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई की अपील की है, ताकि धार्मिक सद्भाव बना रहे। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और विभिन्न समुदायों में चर्चा का विषय बन गया है।
