Aaj Ka Panchang : 9 फरवरी 2026 (सोमवार), आस्था, साधना और संतुलन का दिव्य संयोग

आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर 9 फरवरी 2026 का सोमवार विशेष आध्यात्मिक महत्व लेकर आया है। आज माता जानकी (सीता) की जयंती के साथ मासिक कालाष्टमी का दुर्लभ योग बन रहा है, जो भक्ति, तप और आत्मशुद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। सोमवार होने के कारण शिव-आराधना का विशेष फल मिलेगा, वहीं तुला से वृश्चिक में संक्रमण करते चंद्रमा मन को संवेदनशील बनाते हुए भी गहन चिंतन की प्रेरणा देंगे। यह दिन मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत अनुकूल है।


तिथि, योग एवं करण

  • तिथि: कृष्ण अष्टमी — पूर्ण रात्रि तक मान्य
  • नक्षत्र: विशाखा — पूरे दिन और रात प्रभावी
  • योग: वृद्धि — 10 फरवरी, रात्रि 12:52 बजे तक; तत्पश्चात ध्रुव योग
  • करण:
    • बालव — सायं 06:12 बजे तक
    • कौलव — पूर्ण रात्रि तक

सूर्य एवं चंद्र स्थिति

  • सूर्योदय: प्रातः 07:04 बजे
  • सूर्यास्त: सायं 06:07 बजे
  • चंद्रोदय: 10 फरवरी, रात्रि 01:19 बजे
  • चंद्रास्त: प्रातः 11:07 बजे
  • चंद्र राशि: तुला; रात्रि 01:11 बजे के बाद वृश्चिक
  • सूर्य राशि: मकर
  • सूर्य नक्षत्र: धनिष्ठा
  • चंद्र नक्षत्र: विशाखा (पूरे दिन)

चन्द्र मास, सम्वत एवं ऋतु

  • विक्रम सम्वत: 2082 (कालयुक्त)
  • शक सम्वत: 1947
  • चन्द्र मास:
    • पूर्णिमांत — फाल्गुन
    • अमांत — माघ
  • ऋतु: शिशिर
  • अयन: उत्तरायण
  • दिनमान: लगभग 11 घं. 02 मि.
  • रात्रिमान: लगभग 12 घं. 56 मि.
  • मध्याह्न काल: 12:35 बजे

आज के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: 05:21 – 06:12
  • प्रातः संध्या: 05:46 – 07:04
  • अभिजित मुहूर्त: 12:13 – 12:58
  • विजय मुहूर्त: 02:26 – 03:10
  • गोधूलि मुहूर्त: 06:04 – 06:30
  • सायाह्न संध्या: 06:07 – 07:24
  • अमृत काल: 10:04 – 11:51
  • निशिता मुहूर्त: 12:09 – 01:01 (10 फरवरी)

आज के अशुभ काल

  • राहुकाल: 08:27 – 09:50
  • यमगण्ड: 11:13 – 12:35
  • गुलिक काल: 01:58 – 03:21
  • दुर्मुहूर्त:
    • 12:58 – 01:42
    • 03:10 – 03:54
  • आडल योग: पूरे दिन
  • वर्ज्य काल: 11:19 – 01:06
  • विंछुड़ो: 01:11 (10 फरवरी) – 07:04
  • बाण: रोग बाण — 10 फरवरी 05:04 तक

दिशा, वास एवं शिववास

  • होमाहुति: गुरु की
  • दिशा शूल: पूर्व
  • चन्द्र वास: पश्चिम
  • राहु वास: उत्तर-पश्चिम
  • शिववास: भगवान शिव माता गौरी के साथ विराजमान

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