हिंदू पंचांग के अनुसार आज माघ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। दिन धार्मिक-आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण के साथ-साथ आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त और चौघड़िया का विशेष महत्व है। दैनिक कार्यों, यात्रा, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों की योजना पंचांग देखकर करना लाभकारी माना जाता है। प्रस्तुत है आज का विस्तृत पंचांग —
तिथि एवं संवत विवरण
- दिन: मंगलवार
- तिथि: माघ मास, कृष्ण पक्ष, दशमी
- दशमी तिथि दोपहर 03:17 बजे तक, इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ
- विक्रम संवत: 2082
- शक संवत: 1947
- अयन: उत्तरायण
- ऋतु: शिशिर
सूर्योदय एवं सूर्यास्त
- सूर्योदय: प्रातः 06:41 बजे
- सूर्यास्त: सायं 05:19 बजे
नक्षत्र, योग व करण
- नक्षत्र: विशाखा – अर्धरात्रि 12:06 बजे तक इसके बाद अनुराधा नक्षत्र का आरंभ
- योग: शूल योग – सायं 07:05 बजे तक इसके बाद गण्ड योग
- करण: विष्टि (भद्रा) – अपराह्न 03:17 बजे तक इसके बाद बव करण (14 जनवरी, प्रातः 04:36 बजे तक)
- चंद्र राशि: तुला (दिन-रात) व्रत-त्योहार
- लोहड़ी पर्व
(पंजाब, हरियाणा, जम्मू एवं दिल्ली में विशेष रूप से मनाया जाता है)
(पंजाब, हरियाणा, जम्मू एवं दिल्ली में विशेष रूप से मनाया जाता है)
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:27 बजे से 06:21 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:15 बजे से 02:54 बजे तक
- निशीथ काल: दोपहर 12:03 बजे से 12:57 बजे तक।
- गोधूलि बेला: सायं 05:42 बजे से 06:09 बजे तक।
- अमृत काल: दोपहर 12:30 बजे से 01:48 बजे तक।
आज के अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल: दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक।
- गुलिक काल: दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक।
- यमगण्ड: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक।
- दुर्मुहूर्त काल: प्रातः 09:21 बजे से 10:03 बजे तक।
- भद्राकाल: प्रातः 07:15 बजे से अपराह्न 03:17 बजे तक।
दिन का चौघड़िया
- रोग (अशुभ): 06:41 सुबह से 08:01 सुबह तक
- उद्वेग (अशुभ): 08:01 सुबह – 09:21 सुबह
- चर (सामान्य): 09:21 सुबह – 10:41 सुबह
- लाभ (शुभ): 10:41 सुबह – 12:00 दोपहर
- अमृत (अत्यंत शुभ): 12:00 दोपहर – 01:20 दोपहर
- काल (अशुभ): 01:20 दोपहर – 02:40 दोपहर
- शुभ (शुभ): 02:40 दोपहर – 04:00 शाम
- रोग (अशुभ): 04:00 शाम – 05:19 शाम तक।
दिशाशूल
- उत्तर दिशा में दिशाशूल
- आवश्यक हो तो यात्रा से पूर्व गुड़ अथवा धनिया सेवन कर यात्रा करें।
विशेष : आज भद्रा का प्रभाव अपराह्न 03:17 बजे तक रहेगा, इस दौरान शुभ एवं मांगलिक कार्यों से परहेज करना उचित है। अभिजीत व अमृत काल में धार्मिक अनुष्ठान, जप-तप और शुभ कार्य करना फलदायी रहेगा।
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