पंचांग के अनुसार पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ आज का दिन धार्मिक-आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल, शुभ-अशुभ मुहूर्त और सूर्य-चंद्र की स्थिति के आधार पर आज का पंचांग दैनिक कार्यों की योजना बनाने में सहायक है। प्रस्तुत है संपूर्ण पंचांग—
आज की तिथि व नक्षत्र
पंचांग के अनुसार आज पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि सुबह 10:51 बजे तक रहेगी, इसके बाद तृतीया तिथि का आरंभ होगा।
नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 23 दिसंबर की सुबह 5:32 बजे तक रहेगा, तत्पश्चात श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा।
चंद्रमा धनु राशि में सुबह 10:07 बजे तक रहेगा, इसके बाद मकर राशि में प्रवेश करेगा।
योग ध्रुव दोपहर 4:41 बजे तक रहेगा।
करण तैतिल रात 11:34 बजे तक प्रभावी रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त व चंद्रमा की स्थिति
- सूर्योदय: सुबह 7:10 बजे
- सूर्यास्त: शाम 5:29 बजे
- चंद्रोदय: सुबह 9:01 बजे
- चंद्रास्त: शाम 7:28 बजे
आज दिन की अवधि 10 घंटे 19 मिनट 11 सेकंड तथा रात्रि की अवधि 13 घंटे 41 मिनट 17 सेकंड रहेगी।
संवत एवं मास विवरण
- विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
- शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
- गुजराती संवत: 2082 (पिंगल)
- चंद्र मास: पौष (पूर्णिमांत एवं अमान्त)
- प्रविष्टे/गते: 7
ऋतु एवं अयन
- द्रिक ऋतु: शिशिर
- वैदिक ऋतु: हेमंत
- द्रिक अयन: उत्तरायण
- वैदिक अयन: दक्षिणायन
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:21 से 6:15 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:48 से 7:10 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: 11:59 से 12:40 बजे तक
- विजय मुहूर्त: 2:03 से 2:44 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:27 से 5:54 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:29 से 6:52 बजे तक
- अमृत काल: रात 10:37 से 23 दिसंबर 12:21 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:53 से 23 दिसंबर 12:47 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग व रवि योग: 23 दिसंबर सुबह 5:32 से 7:11 बजे तक
आज के अशुभ समय
- राहुकाल: सुबह 8:28 से 9:45 बजे तक
- यमगण्ड: 11:02 से 12:20 बजे तक
- गुलिक काल: 1:37 से 2:55 बजे तक
- विडाल योग: सुबह 7:10 से रात 11:05 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: 12:40 से 1:22 बजे तक
- वर्ज्य काल: 12:14 से 1:58 बजे तक
- बाण: चोर – 23 दिसंबर सुबह 1:26 बजे तक तथा दोपहर 2:44 से 3:26 बजे तक
महत्वपूर्ण योग
- दिशा शूल: पूर्व दिशा (पूर्व दिशा की यात्रा से बचें)
- अग्निवास: 10:51 बजे तक आकाश में, तत्पश्चात पाताल में
- चंद्र वास: सुबह 10:07 बजे तक पूर्व में, फिर दक्षिण में
- शिववास: 10:51 बजे तक माता गौरी के साथ।
धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा और शुभ कार्यों से पूर्व पंचांग के अनुसार मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है।
