17 अक्टूबर को महासप्तमी, शुभ मुहूर्त में होगी आराधना; मां के पट खुलने के साथ शुरू होंगे दर्शन
विशेष संवाददाता , ख़बर मॉर्निंग
नोएडा। शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन शनिवार, 17 अक्टूबर को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी। महासप्तमी के अवसर पर मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। इस अवसर पर माता का भव्य शृंगार, आरती, दुर्गा सप्तशती का पाठ और विशेष भोग अर्पित करने की तैयारियां की जा रही हैं। कई स्थानों पर परंपरा के अनुसार माता को छप्पन भोग भी अर्पित किया जाएगा।
मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त : पंचांग के अनुसार, 17 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। मां कालरात्रि की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:59 बजे से 5:47 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक बताया गया है। इसके अतिरिक्त दोपहर 3:54 बजे से शाम 6:14 बजे तक पूजा-अर्चना के लिए शुभ समय बताया गया है। श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और मंदिर की परंपरा के अनुसार पूजा का समय निर्धारित कर सकते हैं।
माता का पट खुलने पर होंगे दर्शन : महासप्तमी पर दुर्गा पूजा पंडालों में माता के पट खुलने का विशेष महत्व होता है। पट खुलने के बाद श्रद्धालु मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर सप्तमी के दिन विशेष अनुष्ठान, पुष्पांजलि, आरती और भोग वितरण किया जाता है। हालांकि, माता का पट खोलने का समय सभी मंदिरों और पूजा समितियों में एक समान नहीं होता। संबंधित पूजा समिति की ओर से घोषित समय के अनुसार ही श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचें।
नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा को छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा अनेक मंदिरों और पूजा पंडालों में निभाई जाती है। इसमें विभिन्न प्रकार की मिठाइयां, फल, पकवान, खीर, मालपुआ, लड्डू और अन्य सात्विक व्यंजन शामिल किए जा सकते हैं। मां कालरात्रि को विशेष रूप से गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करने की मान्यता है। पूजा के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों के भय और संकट दूर कर उन्हें साहस, सुरक्षा और शक्ति प्रदान करती हैं।
दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाला स्वरूप : मां कालरात्रि को नवदुर्गा का उग्र और शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। उनका स्वरूप भले ही भय उत्पन्न करने वाला दिखाई देता हो, लेकिन भक्तों के लिए वे शुभ फल प्रदान करने वाली देवी हैं। इसी कारण उन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। श्रद्धालु इस दिन मां की आराधना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और संकटों से रक्षा की कामना करते हैं। महासप्तमी पर मंदिरों में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान नवरात्रि की भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा को और प्रगाढ़ बनाएंगे।
