आज का पंचांग, 17 अक्टूबर 2026: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा, सरस्वती प्रधान पूजा का भी विशेष महत्व

 शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन शनिवार, 17 अक्टूबर को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिरों और पूजा पंडालों में धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां तेज हैं। आज आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की उपासना से भय, बाधाओं और नकारात्मकता से मुक्ति तथा साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। आज सरस्वती की प्रधान पूजा का भी विशेष महत्व है। एनसीआर में इसके लिए दोपहर 3:32 बजे से शाम 5:50 बजे तक का समय बताया गया है।

सप्तमी तिथि और नक्षत्र: पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर की सुबह 5:54 बजे से प्रभावी है और 18 अक्टूबर की सुबह 8:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। शनिवार सुबह 9:47 बजे तक मूल नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ होगा। आज सुबह 6:23 बजे से 9:47 बजे तक रवि योग रहेगा। धार्मिक कार्यों और पूजा-अर्चना के लिए इसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।

शुभ मुहूर्त: आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:43 बजे से 5:33 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक है। गोधूलि मुहूर्त शाम 5:50 बजे से 6:15 बजे तक रहेगा। इन समयों में श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। सरस्वती की प्रधान पूजा के लिए एनसीआर में दोपहर 3:32 बजे से शाम 5:50 बजे तक का समय बताया गया है।

राहुकाल और अशुभ समय: शनिवार को राहुकाल सुबह 9:15 बजे से 10:40 बजे तक रहेगा। यमगण्ड दोपहर 1:32 बजे से 2:58 बजे तक और गुलिक काल सुबह 6:23 बजे से 7:49 बजे तक रहेगा। दुष्टमुहूर्त सुबह 6:23 बजे से 7:09 बजे तक तथा 7:09 बजे से 7:54 बजे तक बताया गया है। वर्ज्य काल सुबह 7:59 बजे से 9:47 बजे तक और रात 8:35 बजे से 10:24 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन अशुभ समयों में नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और दैनिक धार्मिक कर्तव्यों पर इसका निषेध नहीं माना जाता।

दुर्गाष्टमी की तिथि को लेकर रखें ध्यान: इस वर्ष अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह 8:28 बजे शुरू होगी और 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। दिए गए व्रत-निर्णय के अनुसार, दुर्गाष्टमी का पर्व 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसलिए केवल नवरात्रि के दिनों की गणना के आधार पर 18 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी न मानें। व्रत, पूजन और पारण के लिए स्थानीय पंचांग तथा निर्धारित धार्मिक परंपरा का पालन करना उचित रहेगा।

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