खबर मॉर्निंग । श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के साथ 22 अगस्त 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। आज दशमी तिथि अगले दिन 23 अगस्त को तड़के 2 बजे तक रहेगी, इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ होगा। ज्येष्ठा नक्षत्र दोपहर 2 बजकर 49 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मूल नक्षत्र शुरू हो जाएगा। दिनभर विष्कुंभ योग रहेगा। चंद्रमा भी दोपहर बाद राशि परिवर्तन करते हुए वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश करेगा।
22 अगस्त 2026 का पंचांग
वार: शनिवार
मास: श्रावण
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: दशमी, 23 अगस्त को तड़के 2:00 बजे तक, इसके बाद एकादशी
नक्षत्र: ज्येष्ठा, दोपहर 2:49 बजे तक; इसके बाद मूल
योग: विष्कुंभ, पूरी रात्रि तक
करण: तैतिल, दोपहर 12:48 बजे तक; इसके बाद गर
चंद्र राशि: वृश्चिक, दोपहर 2:49 बजे तक; इसके बाद धनु
दिशाशूल: पूर्व दिशा
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: प्रातः 5:54 बजे
सूर्यास्त: सायं 6:54 बजे
चंद्रोदय: दोपहर 3:06 बजे
चंद्रास्त: रात 1:01 बजे, 23 अगस्त को
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 3:55 बजे से 4:41 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 बजे से 12:50 बजे तक।
अमृत काल: आज अमृत काल नहीं है।
ब्रह्म मुहूर्त को साधना, ध्यान, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष शुभ माना जाता है। वहीं अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्यों का आरंभ करना भी परंपरा में उत्तम माना गया है।
आज के अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: प्रातः 9:00 बजे से 10:30 बजे तक।
गुलिक काल: प्रातः 6:00 बजे से 7:30 बजे तक।
यमगंड: दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक।
इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से सामान्यतः बचने की धार्मिक परंपरा है।
22 अगस्त का चौघड़िया
काल: प्रातः 5:54 बजे से 7:31 बजे तक।
शुभ: प्रातः 7:31 बजे से 9:09 बजे तक।
रोग: प्रातः 9:09 बजे से 10:46 बजे तक।
उद्वेग: प्रातः 10:46 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक।
इनमें शुभ चौघड़िया को सामान्यतः मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है, जबकि रोग, उद्वेग और काल चौघड़िया में महत्वपूर्ण कार्यों से बचने की परंपरा है।
शिववास : आज शिववास सभा में रहेगा। यह स्थिति 23 अगस्त को तड़के 2 बजे तक बताई गई है, इसके बाद क्रीड़ा में शिववास माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिववास की स्थिति को ध्यान में रखकर भगवान शिव से जुड़े विशेष अनुष्ठानों और पूजा-विधि का विचार किया जाता है।
आज का धार्मिक महत्व
श्रावण शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखती है। श्रावण मास स्वयं भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में आज शिवलिंग पर जल अर्पित करना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पण और शिव-पार्वती की पूजा करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
दोपहर 2:49 बजे के बाद चंद्रमा के धनु राशि में प्रवेश के साथ दिन की ग्रह स्थिति में परिवर्तन होगा। वहीं अगले दिन तड़के एकादशी तिथि शुरू होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए व्रत और धार्मिक साधना की दृष्टि से भी यह दिन महत्वपूर्ण हो जाता है।
नोट: पंचांग के मुहूर्त और समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार समय का मिलान करना उचित है।
