खबर मार्निंग, धर्म डेस्क
सनातन धर्म में सावन मास को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना गया है। सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने के साथ भगवान शिव की आराधना का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर विधि-विधान से पूजा करने से नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
17 अगस्त 2026, सोमवार को सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी। पंचमी तिथि शाम 5 बजकर 1 मिनट तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन नाग पंचमी का विशेष पर्व मनाया जाएगा। चित्रा नक्षत्र सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इसके बाद स्वाती नक्षत्र प्रारंभ होगा। शुभ योग रात 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
17 अगस्त 2026 का पंचांग
वार: सोमवार
तिथि: सावन शुक्ल पंचमी, शाम 5:01 बजे तक इसके बाद: शुक्ल षष्ठी तिथि
नक्षत्र: चित्रा, सुबह 4:59 बजे तक
योग: शुभ, रात 3:30 बजे तक
विशेष: नाग पंचमी
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 5:50 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:59 बजे
17 अगस्त के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 बजे से 5:35 बजे तक
प्रातः सन्ध्या: सुबह 5:13 बजे से 6:20 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 1:08 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:50 बजे से 3:41 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:05 बजे से 7:27 बजे तक
सायाह्न सन्ध्या: शाम 7:05 बजे से 8:12 बजे तक
अमृत काल: रात 10:16 बजे से 11:57 बजे तक
दिन का चौघड़िया
अमृत| सुबह 5:50 से 7:29 बजे तक
काल| सुबह 7:29 से 9:07 बजे तक
शुभ| सुबह 9:07 से 10:46 बजे तक
रोग| सुबह 10:46 से दोपहर 12:24 बजे तक
उद्वेग| दोपहर 12:24 से 2:03 बजे तक
चर| दोपहर 2:03 से 3:41 बजे तक
लाभ| दोपहर 3:41 से शाम 5:20 बजे तक
अमृत| शाम 5:20 से 7:00 बजे तक
रात का चौघड़िया
चर| शाम 7:00 से रात 8:21 बजे तक
रोग| रात 8:21 से 9:43 बजे तक
काल| रात 9:43 से 11:04 बजे तक
लाभ| रात 11:04 से 12:25 बजे तक
उद्वेग| रात 12:25 से 1:47 बजे तक
शुभ| रात 1:47 से 3:08 बजे तक
अमृत| रात 3:08 से 4:30 बजे तक
चर| सुबह 4:30 से 5:51 बजे तक
आज के अशुभ मुहूर्त
गुलिक काल: दोपहर 2:03 बजे से 3:41 बजे तक
राहुकाल: सुबह 7:30 बजे से 9:08 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा का विशेष विधान माना गया है। हिंदू धर्म में नागों का संबंध भगवान शिव से भी माना जाता है। भगवान शिव के गले में नाग का विराजमान होना नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है। यही कारण है कि सावन के महीने में पड़ने वाली नाग पंचमी को शिव भक्त विशेष श्रद्धा के साथ मनाते हैं।
इस दिन नाग देवता को दूध, जल, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। कई स्थानों पर नाग देवता की प्रतिमा या चित्र की पूजा की जाती है। श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक भी करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा भय से मुक्ति की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से रक्षा और परिवार में मंगल की कामना की जाती है। हालांकि पूजा-पद्धति और मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।
खबर मार्निंग की ओर से सभी पाठकों को नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
