श्रावण मास का प्रत्येक दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। इस पावन दिन श्रद्धालु शिव पूजन, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत-उपासना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यदि आप आज किसी शुभ कार्य, यात्रा, पूजा-पाठ, खरीदारी या नए कार्य की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो उससे पहले दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया, योग, नक्षत्र और शिववास का समय अवश्य जान लें।
आज का पंचांग (1 अगस्त 2026)
तिथि: श्रावण मास, कृष्ण पक्ष तृतीया – रात्रि 10:07 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ।
नक्षत्र: शतभिषा – रात्रि 8:45 बजे तक, इसके बाद पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र।
योग: शोभन योग – रात्रि 11:22 बजे तक, इसके बाद अतिगण्ड योग आरंभ।
करण
वणिज: रात्रि 10:32 बजे से 1 अगस्त प्रातः 10:53 बजे तक।
विष्टि: प्रातः 10:53 बजे से रात्रि 11:07 बजे तक।
बव: रात्रि 11:07 बजे से 2 अगस्त प्रातः 11:15 बजे तक।
सूर्य एवं चंद्रमा
सूर्योदय: प्रातः 6:00 बजे
सूर्यास्त: सायं 7:01 बजे
चन्द्रोदय: रात्रि 8:54 बजे
चन्द्रास्त: 2 अगस्त प्रातः 9:03 बजे
आज का शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:25 बजे से 5:13 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:07 बजे से 12:59 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 1:09 बजे से 2:50 बजे तक
दिन का शुभ चौघड़िया
शुभ (उत्तम): प्रातः 7:24 बजे से 9:05 बजे तक
चर (सामान्य): दोपहर 12:27 बजे से 2:09 बजे तक
लाभ (उन्नति): दोपहर 2:09 बजे से 3:50 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): सायं 3:50 बजे से 5:31 बजे तक
रात्रि का शुभ चौघड़िया
लाभ (उन्नति): सायं 7:12 बजे से रात्रि 8:31 बजे तक
शुभ (उत्तम): रात्रि 9:50 बजे से 11:09 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): रात्रि 11:09 बजे से 2 अगस्त 12:28 बजे तक
चर (सामान्य): 2 अगस्त रात्रि 12:28 बजे से 1:46 बजे तक
लाभ (उन्नति): 2 अगस्त प्रातः 4:24 बजे से 5:43 बजे तक
आज का अशुभ काल
राहुकाल: प्रातः 9:17 बजे से 10:55 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 2:11 बजे से 3:49 बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 6:01 बजे से 7:39 बजे तक
दुर्मुहूर्त: प्रातः 7:45 बजे से 8:38 बजे तक
वर्ज्यम्: प्रातः 3:23 बजे से 5:02 बजे तक
दिशाशूल : पूर्व दिशा में
शिववास : क्रीड़ा में: रात्रि 11:07 बजे तक इसके बाद कैलाश पर।
विशेष: श्रावण मास में भगवान शिव की उपासना, महामृत्युंजय मंत्र का जप, रुद्राभिषेक और शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा एवं अक्षत अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। शुभ मुहूर्त में किए गए मांगलिक कार्यों का महत्व और भी बढ़ जाता है, जबकि राहुकाल एवं अन्य अशुभ काल में नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
