भारतीय सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि और समय का विवरण नहीं, बल्कि दैनिक जीवन को शुभ-अशुभ प्रभावों के अनुरूप व्यवस्थित करने का एक महत्वपूर्ण आधार है। 03 जुलाई 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पूर्वाह्न तक विद्यमान रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। दिन में विष्कुम्भ योग तथा उसके पश्चात प्रीति योग का प्रभाव रहेगा। वहीं प्रातःकाल सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होने से अनेक मांगलिक एवं शुभ कार्यों के लिए समय अनुकूल माना गया है। रात्रि में चंद्रमा के कुंभ राशि में प्रवेश के साथ ही पंचक भी प्रारंभ होगा, इसलिए पंचक से संबंधित कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
आज की तिथि एवं ग्रह-नक्षत्र स्थिति
तिथि – आषाढ़ कृष्ण तृतीया प्रातः 11:21 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ।
योग – विष्कुम्भ योग सायं 05:00 बजे तक, तत्पश्चात प्रीति योग।
चंद्रमा – मकर राशि में रात्रि 12:49 बजे तक, उसके बाद कुंभ राशि में प्रवेश।
पंचक प्रारंभ – रात्रि 12:49 बजे से।
सूर्य एवं चंद्रमा का समय
सूर्योदय – प्रातः 05:52 बजे
सूर्यास्त – रात्रि 09:57 बजे
चंद्रोदय – 04 जुलाई को प्रातः 12:04 बजे
चंद्रास्त – प्रातः 09:03 बजे
आज का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04:49 बजे से 05:21 बजे तक
प्रातः संध्या – प्रातः 05:05 बजे से 05:52 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग – प्रातः 05:52 बजे से 08:16 बजे तक
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 01:23 बजे से 02:27 बजे तक
विजय मुहूर्त – सायं 04:35 बजे से 05:40 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त – रात्रि 09:55 बजे से 10:11 बजे तक
सायाह्न संध्या – रात्रि 09:57 बजे से 10:45 बजे तक
अमृत काल – रात्रि 10:59 बजे से अगले दिन 12:42 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल – प्रातः 11:54 बजे से दोपहर 01:55 बजे तक
गुलिक काल – प्रातः 07:53 बजे से 09:54 बजे तक
यमगण्ड – सायं 05:56 बजे से रात्रि 07:56 बजे तक
दुर्मुहूर्त – प्रातः 09:05 बजे से 10:10 बजे तक
वर्ज्य – दोपहर 12:36 बजे से 02:20 बजे तक
भद्रा – प्रातः 05:52 बजे से 07:50 बजे तक।
पंचक का प्रभाव: आज रात्रि में चंद्रमा के कुंभ राशि में प्रवेश के साथ पंचक का आरंभ होगा। पंचक काल 04 जुलाई की प्रातः 05:53 बजे तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों, जैसे गृह निर्माण की शुरुआत, छत निर्माण, दक्षिण दिशा की यात्रा तथा लकड़ी संग्रह आदि को टालने की परंपरा रही है। हालांकि आवश्यक कार्य योग्य परामर्श एवं उचित विधि-विधान के साथ किए जा सकते हैं।
आज का विशेष महत्व : शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और देवी संतोषी की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। प्रातःकाल बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग तथा दिन में प्रीति योग का प्रभाव आर्थिक उन्नति, पारिवारिक सुख-शांति और आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ संकेत देता है। श्रद्धालु आज देवी लक्ष्मी की पूजा, श्रीसूक्त पाठ तथा दान-पुण्य के कार्य कर विशेष पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
