भारतीय सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि और समय का विवरण नहीं, बल्कि दैनिक जीवन को शुभ-अशुभ प्रभावों के अनुरूप व्यवस्थित करने का महत्वपूर्ण आधार है। आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो सायं 07 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। इसके उपरांत त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। आज प्रदोष व्रत एवं प्रदोष पूजा का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अतिगंड योग के बाद सुकर्मा योग का निर्माण होगा, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
आज चंद्रमा मेष राशि में स्थित हैं तथा आश्विनी और भरणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। अतिगंड योग रात्रि 09 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, उसके बाद सुकर्मा योग प्रारंभ होगा। कौलव करण का भी विशेष प्रभाव दिनभर बना रहेगा।
आज का पंचांग : तिथि – ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी, सायं 07 बजकर 37 मिनट तक, तत्पश्चात त्रयोदशी
योग – अतिगंड योग रात्रि 09 बजकर 26 मिनट तक, उसके बाद सुकर्मा योग
करण – कौलव
नक्षत्र – आश्विनी एवं भरणी
चंद्रमा – मेष राशि में
सूर्य एवं चंद्र संबंधी समय
सूर्योदय – प्रातः 05 बजकर 44 मिनट
सूर्यास्त – सायं 07 बजकर 08 मिनट
चंद्रोदय – प्रातः 02 बजकर 41 मिनट
चंद्रास्त – सायं 04 बजकर 18 मिनट
प्रदोष पूजा मुहूर्त
प्रदोष पूजा मुहूर्त – सायं 07 बजकर 36 मिनट से रात्रि 09 बजकर 20 मिनट तक
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04 बजकर 44 मिनट से प्रातः 05 बजकर 15 मिनट तक
प्रातः संध्या – प्रातः 05 बजकर 00 मिनट से प्रातः 05 बजकर 47 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 18 मिनट से दोपहर 02 बजकर 23 मिनट तक
विजय मुहूर्त – सायं 04 बजकर 32 मिनट से सायं 05 बजकर 36 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – रात्रि 09 बजकर 52 मिनट से रात्रि 10 बजकर 08 मिनट तक
अमृत काल – रात्रि 08 बजकर 16 मिनट से रात्रि 09 बजकर 42 मिनट तक
आज के अशुभ मुहूर्त
राहुकाल – प्रातः 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 01 बजकर 51 मिनट तक
यमगण्ड – सायं 05 बजकर 52 मिनट से सायं 07 बजकर 53 मिनट तक
गुलिक काल – प्रातः 07 बजकर 48 मिनट से प्रातः 09 बजकर 49 मिनट तक
धार्मिक महत्व : आज की द्वादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। वहीं सायंकाल त्रयोदशी तिथि के आरंभ के साथ प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष फल प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत करने वाले श्रद्धालुओं के लिए आज का दिन विशेष पुण्यदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सुकर्मा योग के प्रभाव से धर्म, दान, पूजा-पाठ एवं मांगलिक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
सनातन धर्म में पंचांग के अनुसार दिनचर्या का पालन व्यक्ति को आध्यात्मिक, मानसिक एवं सामाजिक संतुलन प्रदान करता है। इसलिए शुभ मुहूर्तों का सदुपयोग तथा अशुभ काल में सावधानी बरतना लाभकारी माना गया है।
