पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों पर एक नजर

 'ये जो पब्लिक है सब जानती है...'

निशिकांत ठाकुर

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि सरकारें तो बदलती रहती हैं, चुनाव भी आते—जाते रहते हैं, लेकिन देश वहीं रहता है। अभी एक केंद्र शासित प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए और उनके परिणाम भी आ गए हैं। सभी पांचों राज्यों में जीत—हार का क्या फैसला हुआ, उसका तो पूरा नजरिया देश के सामने आ ही चुका है, लेकिन देश में जिस राज्य के चुनाव पर जनता का सबसे ज्यादा फोकस रहा, वह था पश्चिम बंगाल। एक तरफ था पंद्रह सालों के सत्तारूढ़ से हिसाब लेना, वहीं दूसरी तरफ मुस्तैद थी केंद्र की एनडीए सरकार। एक तरफ एक क्रांतिकारी महिला मुख्यमंत्री, तो दूसरी तरफ थी सत्ता की पूरी ताकत। स्वाभाविक रूप से केंद्रीय सत्ता की ताकत की जीत हुई और क्रांतिकारी महिला के हाथ से सत्ता फिसल गई। इसलिए इस बार विशेष रूप से सभी राज्यों पर तो बाद में बात करेंगे, लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल के ही चुनाव को देखने समझने का प्रयास करते हैं। वर्तमान में अब तक के पदस्थ 30 मुख्यमंत्रियों में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी एकमात्र महिला मुख्यमंत्री थीं।

वर्ष 2021 से 4 मई, 2026 तक तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन, यानी डीएमके की सरकार थी। अब, इस बार के विधानसभा चुनाव ने बहुत बड़ा उलटफेर कर दिया है। तमिलगा (टीवीके) अभिनेता थलपति विजय की पार्टी, जिसे पैदा हुए महज दो साल ही हुआ है, सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आती दिख रही है और वह सरकार बनाने के करीब है। टीवीके सत्तारूढ़ डीएमके से आगे निकलती दिख रही है, जबकि एआईडीएमके भी कड़ी टक्कर दे रही है।

4 मई 2026 की जानकारी के अनुसार, केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने शानदार जीत हासिल की है, जिससे राज्य में 10 साल से सत्ता में रही लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार का अंत हो गया है। यूडीएफ ने 140 में से 100 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की एलडीएफ पीछे रही। 9 अप्रैल, 2026 को एकल चरण में 78.27% मतदान हुआ था। वर्ष 1977 के बाद यह पहली बार है कि राज्य ने लगातार दो बार एक ही गठबंधन (एलडीएफ) को सत्ता से बाहर कर कांग्रेस को चुना है। भाजपा-नेतृत्व वाले एनडीए ने तीन सीटें जीतकर राज्य में अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराई है। 

यूडीएफ की जीत के बाद मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चा तेज है, जिसमें वर्तमान विपक्ष के नेता वीडी श्रीनिवासन का नाम उनकी आक्रामक छवि के कारण सबसे आगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल का नाम भी मुख्यमंत्री की रेस में है। शशि थरूर के नाम पर भी चर्चा चल रही है, हालांकि अभी मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। रमेश चेन्निथला वरिष्ठता के आधार पर दावेदारी ठोक रहे हैं। कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने कहा है कि मुख्यमंत्री का अंतिम फैसला नवनिर्वाचित विधायक करेंगे, न कि पर्ची से मुख्यमंत्री का चयन होगा। 

मई 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों के अनुसार, पुडुचेरी में एन. रंगास्वामी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस गठबंधन की सरकार दोबारा बन रही है। एनडीए ने 30 में से 18 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है, जिसमें ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस ने 12 और भाजपा ने 4 सीटें जीती हैं। एन. रंगासामी फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे, यह तय माना जा रहा है। एनडीए ने 30 में से 18 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा (16) पार किया। मुख्यमंत्री रंगासामी ने थट्टनचावड़ी निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की है। कांग्रेस और डीएमके गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। यह रंगासामी के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार एनडीए सरकार की वापसी है। कांग्रेस, जिसने पांच अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन पर भरोसा किया था, केवल 19 सीटें ही जीत पाई। 15 साल के शासन के बाद 2016 में भाजपा से सत्ता गंवाने के बाद से यह उसका सबसे खराब प्रदर्शन है। उसके सहयोगियों में से केवल रायजोर दल को ही जीत मिली। कांग्रेस के असम चुनाव प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने पार्टी के खराब प्रदर्शन की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, जिन्होंने लगातार छठी बार जलुकबारी सीट बरकरार रखी, ने कहा कि 'एक सीट को छोड़कर, हमने उन सभी सीटों पर जीत हासिल की है जहां हिंदू अपने उम्मीदवारों को चुनने की स्थिति में हैं। मैं भाजपा और हमारे सहयोगियों की ओर से असम की जनता को धन्यवाद देता हूं और उन्हें आश्वासन देता हूं कि हमने चुनाव के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें हम पूरा करेंगे।' दूसरी ओर, असम सोनमिलितो मंच (विपक्षी गठबंधन) के चुनाव प्रचार का नेतृत्व करने वाले राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट सीट से भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से 23,182 वोटों से हार गए। कांग्रेस की सहयोगी असम जनता पार्टी के अध्यक्ष लुरिंज्योति गोगोई को भी हार का सामना करना पड़ा।

फिर अब पश्चिम बंगाल की बात करें, तो इस राज्य में बतौर मुख्यमंत्री सबसे लंबा कार्यकाल ज्योति बसु का रहा है। उन्होंने सीपीआई(एम) के नेता के रूप में 1977 से 2000 तक लगातार 23 वर्षों से अधिक (23 साल 137 दिन) मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया, जो राज्य के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। नवंबर 2000 (लगभग 23 वर्ष, 137 दिन) तक उन्होंने लगातार पांच बार मुख्यमंत्री के रूप में बंगाल की कमान संभाली। 2000 में इस्तीफा देने के समय, वह भारत में किसी भी राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री थे। वर्तमान में ममता बनर्जी दूसरी सबसे लंबी अवधि तक सेवा करने वाली मुख्यमंत्री थीं। इस चुनाव में ममता बनर्जी की सरकार हिल गई, तो दूसरी ओर तमिलनाडु में डीएमके की भी हार हो गई। केरल जैसा बुद्धिजीवी राज्य, जो लेफ्ट का किला था, वह भी ढह गया। इस जीत—हार की पूरी जिम्मेदारी केवल जनता को है, जिन्होंने अपनी जरूरतों और आकांक्षाओं के हिसाब से पांचों राज्यों में अपने हिसाब से नेताओं का चयन किया।

यहीं स्व.अटल बिहारी बाजपेई बात चरितार्थ होती है कि चुनाव तो होते ही रहते हैं और सरकारें भी बनती—बिगड़ती हैं। इस सत्य को इन विधानसभाओं के चुनावों ने स्पष्ट कर दिया; क्योंकि कई राज्याें में नई सरकार बनी, तो कई राज्यों में पुरानी सरकार ही अपने दमखम से चुनाव जीतकर फिर से सत्ता में लौट आई है। ऐसा तो हर चुनाव में होता ही है क्योंकि यहां नेताओं का नहीं, जनता की मर्जी चलती है। उसका मूड है, जो कब किसे राजा या भिखारी बना दे, कहना मुश्किल है। इसलिए जनता को बहुत दिनों तक झांसे में रखना आसान काम नहीं है। ऐसा ही इन पुरानी सरकारों द्वारा किया गया स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जो भी हो, सरकार किसीं की बने जनता की सुख—सुविधा के साथ शिक्षा, रोजगार जो सरकार दे सकेगी, वही सर्वोच्च कुर्सी पर बैठने योग्य होगी। और, फिर उसका कार्यकाल भी लंबा चलता है। अपने यहां कहा जाता है कि कामना पूरी नहीं होने पर व्यक्ति क्रोध में विवेक खो बैठता है। उसे आगे—पीछा नहीं सूझता और वह मनमानी कर बैठता है। आखिर परिणाम उसे ही भुगतना पड़ता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)

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